INS सागरध्वनि की मलेशिया यात्रा संपन्न, भारत-मलेशिया समुद्री सहयोग को नई मजबूती
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Indian Navy
INS सागरध्वनि का मलेशिया में सफल समुद्री मिशन.
भारत और मलेशिया के बीच वैज्ञानिक सहयोग पर चर्चा.
समुद्र विज्ञान और तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ावा.
Delhi / भारतीय नौसेना का समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत INS Sagardhwani एक सफल अंतरराष्ट्रीय समन्वय कार्यक्रम के बाद 15 मई 2026 को मलेशिया के पोर्ट क्लांग से रवाना हुआ। यह यात्रा भारत और मलेशिया के बीच समुद्री सहयोग और वैज्ञानिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस दौरान रॉयल मलेशियन नौसेना के साथ कई स्तरों पर पेशेवर और तकनीकी संवाद हुआ।
कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के नौसैनिक विशेषज्ञों ने समुद्र विज्ञान, जलवैज्ञानिक तकनीकों और समुद्री पर्यावरण अनुसंधान पर अपने अनुभव साझा किए। आधुनिक समुद्र विज्ञान में उपयोग होने वाली तकनीकों, डेटा विश्लेषण और समुद्री सुरक्षा प्रणालियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इससे दोनों नौसेनाओं के बीच तकनीकी समझ और सहयोग को नई दिशा मिली।
रॉयल मलेशियन नौसेना के जलवैज्ञानिक विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने जहाज का दौरा किया और वहां मौजूद उन्नत समुद्रवैज्ञानिक प्रणालियों का अवलोकन किया। उन्होंने जहाज पर स्थापित तकनीकी उपकरणों और डेटा संग्रहण प्रणाली के कार्यप्रणाली को करीब से समझा। यह दौरा दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग को और गहरा करने वाला साबित हुआ।
इस दौरान विषय वस्तु विशेषज्ञ आदान-प्रदान (SMEE) कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें डेटा-आधारित रखरखाव, प्रवृत्ति विश्लेषण, नौवहन सुरक्षा उपकरण और तकनीक आधारित निर्णय प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इन चर्चाओं का उद्देश्य समुद्री अभियानों को अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी बनाना था।
जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने कुआलालंपुर में भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात की। इस बैठक में चल रहे समुद्र विज्ञान मिशन, भविष्य की योजनाओं और भारत-मलेशिया सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। उच्चायुक्त ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों का प्रतीक बताया।
यह पूरा दौरा केवल एक तकनीकी आदान-प्रदान नहीं था, बल्कि यह भारत और मलेशिया के बीच बढ़ते समुद्री रिश्तों का भी संकेत है। दोनों देशों की नौसेनाओं ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस तरह के सहयोग और संयुक्त अभ्यास जारी रहेंगे, जिससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूती मिलेगी।