मनोज जरांगे का बड़ा ऐलान: 30 मई से अनिश्चितकालीन अनशन, मराठा आरक्षण पर बढ़ा विवाद
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Manoj Jarange
मनोज जरांगे ने 30 मई से अनशन की घोषणा की.
सरकार को 29 मई तक का अल्टीमेटम दिया गया.
मराठा आरक्षण और कुनबी प्रमाणपत्र मुख्य मांग.
Mumbai / मराठा आरक्षण को लेकर राज्य में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शनिवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वे 30 मई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को 29 मई तक का अल्टीमेटम देते हुए मराठवाड़ा क्षेत्र में कुनबी जाति प्रमाणपत्र वितरण की प्रक्रिया को तुरंत बहाल करने की मांग की है।
जरांगे ने जालना जिले के अंतरवाली सारती गांव में मीडिया से बातचीत करते हुए मराठा आरक्षण उप-समिति को भंग करने की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि यह समिति समुदाय के हित में कोई ठोस काम नहीं कर पाई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को मराठा और कुनबी समुदायों के लिए अलग-अलग मंत्रालय बनाना चाहिए, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से हो सके।
उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने मराठा समुदाय को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया रोक दी है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है। पहले प्रमाणपत्र दिए जा रहे थे, लेकिन अब प्रशासनिक आदेशों के चलते इसे बंद कर दिया गया है। जरांगे के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रक्रिया को रोकने का निर्णय लिया है, जिससे समुदाय के लोगों को नुकसान हो रहा है।
जरांगे ने यह भी कहा कि हैदराबाद, सतारा और औंध जैसे ऐतिहासिक राजपत्रों के अनुसार प्रमाणपत्र जारी किए जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आठ महीने पहले सतारा राजपत्र की घोषणा के बावजूद इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा उन्होंने यह भी मांग की कि मराठा आंदोलन के दौरान दर्ज सभी पुलिस मामलों को वापस लिया जाए।
उनका कहना है कि सरकार अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर राज्य में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
इसी बीच, राज्य में चल रहे विकास और धार्मिक महत्व के मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। संत तुकाराम महाराज पालकी मार्ग, जो आषाढ़ी वारी के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, उस पर भी हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
कुल मिलाकर, मराठा आरक्षण आंदोलन एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां सरकार और आंदोलनकारी दोनों पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया है।