जनगणना 2027 की शुरुआत: कई राज्यों में HLO कार्य शुरू, डिजिटल स्व-गणना को मिला अच्छा रिस्पॉन्स
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census 2027
कई राज्यों में जनगणना 2027 का HLO कार्य शुरू.
स्व-गणना पोर्टल को मिला अच्छा रिस्पॉन्स.
डिजिटल और फील्ड दोनों तरीके से हो रही जनगणना.
Delhi / देश में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं और इसके पहले चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO) का फील्ड कार्य कई राज्यों में शुरू कर दिया गया है। इस बड़े राष्ट्रीय अभियान का उद्देश्य देश के हर परिवार, हर घर और उनकी जीवन स्थितियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, ताकि भविष्य की नीतियां और योजनाएं अधिक सटीक और प्रभावी बनाई जा सकें।
पहले चरण की शुरुआत राजस्थान, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली के MCD क्षेत्रों में की गई है, जहां प्रगणक घर-घर जाकर डेटा एकत्र कर रहे हैं। इसी के साथ आंध्र प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भी यह कार्य जारी है। विभिन्न क्षेत्रों में टीमें नागरिकों से मिलकर आवासीय स्थिति, सुविधाओं और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र कर रही हैं।
कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्व-गणना (Self Enumeration - SE) की सुविधा भी शुरू की गई है। गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी में नागरिक 31 मई 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी भर सकते हैं। इसके बाद 1 जून से 30 जून तक वहां फील्ड गणना की प्रक्रिया चलेगी। उत्तर प्रदेश में भी स्व-गणना की सुविधा जारी है, जो 21 मई तक उपलब्ध रहेगी, और इसके बाद वहां भी घर-घर सर्वे किया जाएगा।
इससे पहले, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली के NDMC तथा कैंटोनमेंट क्षेत्रों में यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इससे यह साफ है कि देशभर में जनगणना का डिजिटल और पारंपरिक दोनों मॉडल समान रूप से आगे बढ़ रहा है।
सरकार के अनुसार, स्व-गणना सुविधा को जनता से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। अब तक 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1.44 करोड़ से अधिक परिवार ऑनलाइन पंजीकरण कर चुके हैं। यह जनगणना प्रक्रिया में तकनीक के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है और लोगों के लिए इसे अधिक सरल और सुविधाजनक बनाता है।
नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे स्व-गणना पूरा करने के बाद अपनी SE ID सुरक्षित रखें और फील्ड में आने वाले प्रगणकों के साथ साझा करें, ताकि डेटा को अंतिम रूप दिया जा सके। जिन लोगों ने ऑनलाइन गणना नहीं की है, उनके लिए अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।
इस बार की जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डेटा संग्रह किया जा रहा है और कुल 33 प्रश्नों के जरिए परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि यह डेटा देश की विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और नीति निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी और केवल सांख्यिकीय उपयोग के लिए ही इस्तेमाल होंगी।
कुल मिलाकर, जनगणना 2027 भारत के प्रशासनिक और डिजिटल विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो देश की वास्तविक तस्वीर को सामने लाने में मदद करेगा और भविष्य की योजनाओं को अधिक मजबूत बनाएगा।