तमिलनाडु में DMK-कांग्रेस गठबंधन में बड़ी दरार, डीएमके ने लगाया ‘विश्वासघात’ का आरोप
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
DMK Congress Conflict
DMK ने कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया.
स्टालिन से मुलाकात न करने पर बढ़ा विवाद.
INDIA गठबंधन में दरार की चर्चाएं तेज.
Chennai / तमिलनाडु की राजनीति में इस समय बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक साथ रहने वाले Dravida Munnetra Kazhagam और Indian National Congress के रिश्तों में अब खुलकर दरार दिखाई देने लगी है। डीएमके ने कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए उस पर “विश्वासघात” का गंभीर आरोप लगाया है।
डीएमके नेताओं का कहना है कि विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने न तो पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात की और न ही गठबंधन की जीत के लिए धन्यवाद दिया। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान भी गठबंधन धर्म का पूरी ईमानदारी से पालन नहीं किया।
दरअसल, 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच कांग्रेस का विजय की पार्टी टीवीके के साथ नजदीकियां बढ़ाना डीएमके को नागवार गुजर रहा है। डीएमके ने AIADMK की ओर से सरकार गठन के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है, लेकिन कांग्रेस के रवैये पर उसकी नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
डीएमके प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष स्टालिन जो भी राजनीतिक फैसला लेंगे, पार्टी उसे स्वीकार करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सीट बंटवारे के दौरान भी गठबंधन विरोधी आवाजों पर रोक नहीं लगाई। इतना ही नहीं, पुडुचेरी चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवारों ने उन सीटों पर भी चुनाव लड़ा जो डीएमके को आवंटित थीं।
डीएमके का कहना है कि उसने कांग्रेस को राज्यसभा सीट और 28 विधानसभा सीटें दी थीं, लेकिन कांग्रेस ने कुछ ही दिनों में दूसरे राजनीतिक विकल्प तलाशने शुरू कर दिए। पार्टी नेताओं के मुताबिक, यह गठबंधन सहयोगियों की मेहनत और भरोसे के साथ धोखा है। डीएमके ने अपने प्रस्ताव में साफ कहा कि कांग्रेस ने “पुराना चरित्र” नहीं बदला है और उसने गठबंधन को कमजोर करने का काम किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ सकता है। खासकर INDIA गठबंधन के भीतर यह घटनाक्रम नई बहस को जन्म दे रहा है। कांग्रेस और डीएमके लंबे समय से सहयोगी रहे हैं, लेकिन अब दोनों के बीच अविश्वास खुलकर सामने आ गया है।
हालांकि डीएमके अभी भी अपने विधायकों को चेन्नई में बनाए हुए है और आगे की रणनीति पर मंथन कर रही है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक फैसले से पहले स्थिति का आकलन कर रहा है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आने वाले समय में लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं। ऐसे में गठबंधनों में हो रहे बदलाव राज्य की राजनीति का पूरा समीकरण बदल सकते हैं।