AI समिट 2026: महासागरों और ब्लू इकोनॉमी पर भारत का बड़ा फोकस

Thu 19-Feb-2026,05:25 PM IST +05:30

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AI समिट 2026: महासागरों और ब्लू इकोनॉमी पर भारत का बड़ा फोकस AI-For-Oceans-India-Blue-Economy-Summit-2026
  • एआई आधारित समुद्री डेटा मॉडलिंग से आपदा पूर्वानुमान, मत्स्य प्रबंधन और जलवायु जोखिम न्यूनीकरण में उल्लेखनीय सुधार संभव।

  • ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए खुले डेटा, डिजिटल अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान भू-विज्ञान मंत्रालय ने “एआई फॉर अवर ओशन्स ऑफ टुमॉरो: डेटा, मॉडल्स एंड गवर्नेंस” विषय पर एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की। इस सत्र में महासागर प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और नीली अर्थव्यवस्था के विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश के नीति विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि और स्टार्टअप जगत के लोग शामिल हुए।

सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि एआई आधारित डेटा मॉडलिंग और पूर्वानुमान प्रणाली समुद्री संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महपात्रा ने महासागरों की जलवायु संतुलन, खाद्य सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि चक्रवात पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में तकनीकी प्रगति से जानमाल की हानि में उल्लेखनीय कमी आई है।

उन्होंने यह भी बताया कि महासागर का बढ़ता तापमान, अम्लीकरण और समुद्र स्तर में वृद्धि जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक भौतिक मॉडलों के साथ एआई-सक्षम डेटा आधारित मॉडल विकसित करना आवश्यक है। डीप ओशन मिशन को गहरे समुद्री अनुसंधान और संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

भारत में नॉर्वे की राजदूत सुश्री मे-एलिन स्टेनर ने भारत-नॉर्वे सहयोग को रेखांकित करते हुए कहा कि एआई आधारित समाधान मत्स्य प्रबंधन, बंदरगाह संचालन और जहाजरानी दक्षता में सुधार ला सकते हैं। उन्होंने खुले डेटा और साझा डिजिटल ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया।

पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने माना कि भारत वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व करते हुए एक डिजिटल महासागर अवसंरचना विकसित कर सकता है, जो खुले डेटा, एआई और सुदृढ़ शासन मॉडल पर आधारित हो। सहायक नीतियों, मिश्रित वित्त और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ब्लू इकोनॉमी को दीर्घकालिक विकास इंजन के रूप में विकसित किया जा सकता है। सत्र के समापन पर मंत्रालय ने समुद्री कार्यक्रमों में एआई के संरचित एकीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई।