उपराष्ट्रपति ने श्री शक्ति अम्मा की 50 वर्ष की आध्यात्मिक यात्रा को बताया प्रेरणास्रोत

Sat 03-Jan-2026,04:55 PM IST +05:30

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उपराष्ट्रपति ने श्री शक्ति अम्मा की 50 वर्ष की आध्यात्मिक यात्रा को बताया प्रेरणास्रोत Vice-President-Sri-Shakti-Amma-Golden-Jubilee
  • श्रीपुरम में शिक्षा, अन्नदान, पेयजल और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पहलों को सच्ची भक्ति से प्रेरित सेवा बताया गया।

  • वृक्षारोपण और सामाजिक कार्यों को प्रधानमंत्री के पर्यावरण संरक्षण दृष्टिकोण के अनुरूप एक महत्वपूर्ण योगदान बताया गया।

Tamil Nadu / Vellore :

Tamilnadu/ भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने तमिलनाडु के वेल्लोर जिले स्थित श्रीपुरम में श्री शक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने श्री शक्ति अम्मा की 50 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा पूर्ण होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह यात्रा केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं रही, बल्कि मानव सेवा, करुणा और सामाजिक उत्थान का व्यापक संदेश देती है।

उपराष्ट्रपति ने श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर की पवित्रता और आध्यात्मिक गरिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस स्थान की महत्ता भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और श्री राम नाथ कोविंद तथा हाल ही में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के दर्शन से स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा कि इन महान व्यक्तित्वों की उपस्थिति इस आध्यात्मिक केंद्र की राष्ट्रीय और नैतिक प्रतिष्ठा को दर्शाती है।

श्री शक्ति अम्मा द्वारा संचालित सामाजिक और परोपकारी कार्यों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्रीपुरम में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी जरूरतों के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति योजनाओं, जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, छात्रों को साइकिल वितरण तथा प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन कराने वाले अन्नदान कार्यक्रम को सच्ची भक्ति से प्रेरित सेवा बताया।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्रीपुरम परिसर में 50 हजार से अधिक वृक्ष लगाए गए हैं और कैलाशगिरि पहाड़ियों पर लाखों पौधों का रोपण किया गया है। उन्होंने इसे धरती माता की सेवा और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण पहलों के अनुरूप बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्ची आध्यात्मिकता कर्मकांड से आगे बढ़कर प्रेम, करुणा और समाज सेवा में प्रकट होती है। उन्होंने कवि सुब्रमण्य भारती के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेम से बढ़कर कोई तपस्या नहीं। इससे पहले, उपराष्ट्रपति ने श्रीपुरम स्थित श्री नारायणी मंदिर में दर्शन कर शांति और समृद्धि की कामना की।