ISRO Space Debris Alert: 22 में से 20 भारतीय उपग्रहों पर टक्कर का खतरा, 29 बार CAM ऑपरेशन सफल
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ISRO Space Debris Alert
इसरो ने 2025-26 में कुल 29 टक्कर बचाव अभियान (CAM) सफलतापूर्वक पूरे किए।
22 में से 20 भारतीय उपग्रह LEO में, जहां अंतरिक्ष मलबे से सबसे अधिक खतरा।
'जीरो डेब्रिस स्पेस मिशन' और नई ट्रैकिंग तकनीकों पर सरकार का विशेष फोकस।
New Delhi / पृथ्वी की निम्न कक्षा (Low Earth Orbit-LEO) में लगातार बढ़ रहे अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) ने दुनिया भर के उपग्रहों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। भारत के अधिकांश सक्रिय उपग्रह भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं। सरकार ने लोकसभा में बताया कि भारत के 22 सक्रिय उपग्रहों में से 20 उपग्रह निम्न पृथ्वी कक्षा (2,000 किलोमीटर से कम ऊंचाई) में कार्यरत हैं, जहां अंतरिक्ष मलबे और अन्य अंतरिक्ष वस्तुओं की अधिक मौजूदगी के कारण टक्कर का जोखिम सबसे ज्यादा है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि इसरो संभावित टक्करों से बचाने के लिए लगातार निगरानी और आवश्यक कार्रवाई कर रहा है। वर्ष 2025 में इसरो ने 20 Collision Avoidance Manoeuvres (CAM) सफलतापूर्वक किए, जबकि 2026 में अब तक 9 CAM संचालित किए जा चुके हैं। इन अभियानों के माध्यम से उपग्रहों की कक्षा में आवश्यक बदलाव कर संभावित टक्कर को टाला गया।
सरकार ने बताया कि अंतरिक्ष गतिविधियों के बढ़ने के साथ तीसरे पक्ष को होने वाले संभावित नुकसान और राज्य की देयता को ध्यान में रखते हुए IN-SPACe ने "भारतीय अंतरिक्ष वस्तुओं से उत्पन्न तीसरे पक्ष के नुकसान के प्रति राज्य की देयता संबंधी नीति ढांचा और दिशा-निर्देश" तैयार किए हैं। यह मसौदा फिलहाल विचाराधीन है और भविष्य में अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण नियामकीय आधार बनेगा।
भारत अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन और सुरक्षित अंतरिक्ष संचालन के लिए वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। देश Inter-Agency Space Debris Coordination Committee (IADC), संयुक्त राष्ट्र के Long-Term Sustainability (UN-LTS) कार्य समूह, Space Situational Awareness (SSA), International Academy of Astronautics (IAA) तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ मिलकर तकनीकी और नीतिगत सहयोग कर रहा है। इसरो ने अंतरिक्ष मलबा शमन (Space Debris Mitigation) संबंधी संशोधित वैश्विक दिशानिर्देशों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत ने वर्ष 2024 में "मलबा मुक्त अंतरिक्ष मिशन" (Debris-Free Space Mission) पहल की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य भविष्य में सरकारी और निजी क्षेत्र सहित सभी भारतीय अंतरिक्ष अभियानों को 'जीरो डेब्रिस' मानकों के अनुरूप संचालित करना है, ताकि अंतरिक्ष में नए मलबे का निर्माण न्यूनतम हो।
अंतरिक्ष निगरानी क्षमता को मजबूत करने के लिए श्रीहरिकोटा में स्थापित मल्टी-ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग रडार (MOTR) निम्न पृथ्वी कक्षा में बड़ी अंतरिक्ष वस्तुओं की निगरानी कर रहा है। वहीं, लद्दाख के हानले में विकसित किया जा रहा अत्याधुनिक ऑप्टिकल टेलीस्कोप अंतिम चरण में है, जो भूस्थिर कक्षा (GEO) में 30 सेंटीमीटर या उससे बड़ी वस्तुओं को ट्रैक करने में सक्षम होगा।
सरकार ने यह भी बताया कि गगनयान मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत विकसित की जा रही बायोमेडिकल, जीवन रक्षक और अन्य उन्नत तकनीकों का विभिन्न जमीनी परीक्षण जारी है। इन तकनीकों का सत्यापन आगामी गगनयान मिशनों में किया जाएगा और भविष्य में इन्हें चिकित्सा, सुरक्षा तथा अन्य सामाजिक क्षेत्रों में भी उपयोग में लाया जा सकेगा।