डिजिटल बदलाव की नई कहानी: एनडीडीबी से सशक्त हो रहा भारत का डेयरी क्षेत्र
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एनडीएलएम के तहत 35.68 करोड़ पशुओं को पशु आधार, पशुधन प्रबंधन में पारदर्शिता और डिजिटल ट्रेसिबिलिटी को मजबूती।
एएमसीएस से 17.3 लाख किसानों को सीधा डिजिटल भुगतान, दूध संग्रह प्रक्रिया में भरोसा और दक्षता में बड़ा सुधार।
जीआईएस आधारित मिल्क रूट ऑप्टिमाइजेशन से परिवहन लागत में कटौती, समयबद्ध डिलीवरी और डेयरी लॉजिस्टिक्स में क्रांतिकारी बदलाव।
दिल्ली/ भारत का डेयरी क्षेत्र, जो देश के करोड़ों किसानों की आजीविका का आधार है, अब एक बड़े डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के नेतृत्व में लागू की गई आधुनिक तकनीकों ने पशुपालन, दूध संग्रह, भुगतान, लॉजिस्टिक्स और निर्णय प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन, ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम और जीआईएस आधारित रूट ऑप्टिमाइजेशन जैसी पहलों से यह क्षेत्र अधिक पारदर्शी, कुशल और किसान-केंद्रित बन रहा है।
भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और वैश्विक दूध उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। इतनी विशाल डेयरी अर्थव्यवस्था को सुचारू, पारदर्शी और टिकाऊ बनाए रखने के लिए डिजिटल तकनीक की भूमिका अब निर्णायक हो चुकी है। इसी दिशा में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने बीते कुछ वर्षों में कई ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और सिस्टम विकसित किए हैं, जिन्होंने भारतीय डेयरी सेक्टर की कार्यशैली को जड़ से बदल दिया है।
राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन: पशुओं की डिजिटल पहचान
पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) के सहयोग से लागू राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM) भारत में पशुधन प्रबंधन का सबसे बड़ा डिजिटल प्रयास है। इस मिशन के तहत प्रत्येक पशु को 12 अंकों वाला यूनिक बार-कोडेड टैग दिया जा रहा है, जिसे “पशु आधार” कहा जाता है। यह टैग पशु की डिजिटल पहचान बन चुका है, जिससे उसके टीकाकरण, प्रजनन, स्वास्थ्य और उपचार से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहता है।
नवंबर 2025 तक देशभर में 35.68 करोड़ से अधिक पशुओं को पशु आधार जारी किया जा चुका है, जबकि “भारत पशुधन” डेटाबेस में 84 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज हो चुके हैं। इससे पशुपालकों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं और पशु चिकित्सकों को भी सटीक डेटा के आधार पर निर्णय लेने में सुविधा हो रही है।
1962 ऐप: किसान के द्वार पर पशु चिकित्सा सेवा
एनडीएलएम के अंतर्गत 1962 मोबाइल ऐप और टोल-फ्री हेल्पलाइन पशुपालकों के लिए वरदान साबित हुई है। इसके माध्यम से किसान मोबाइल वेटरनरी यूनिट को सीधे अपने घर बुला सकते हैं। साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं और पशुपालन से जुड़े वैज्ञानिक तरीकों की प्रमाणिक जानकारी भी मिलती है।
ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम: पारदर्शिता की रीढ़
भारतीय सहकारी डेयरी मॉडल की नींव दूध संग्रह प्रणाली पर टिकी है। इसे अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए एनडीडीबी ने ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम (AMCS) विकसित किया है। यह सिस्टम दूध की मात्रा, गुणवत्ता और फैट की सटीक माप कर डिजिटल रूप से दर्ज करता है और भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में करता है।
22 अक्टूबर 2025 तक 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 26,000 से अधिक डेयरी सहकारी समितियां इस सिस्टम से जुड़ चुकी हैं। इसके जरिए 54 दुग्ध संघों के 17.3 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। किसानों को एसएमएस के जरिए तुरंत भुगतान और दूध बिक्री की जानकारी मिलती है, जिससे उनके भरोसे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
एएमसीएस मोबाइल ऐप और पोर्टल
एएमसीएस के तहत सोसायटी सेक्रेटरी, सुपरवाइजर और किसानों के लिए अलग-अलग एंड्रॉइड ऐप विकसित किए गए हैं। ये ऐप डिजिटल पासबुक की तरह काम करते हैं। अक्टूबर 2025 तक 2.43 लाख किसान, 1,374 सुपरवाइजर और 13,644 सेक्रेटरी इन ऐप्स पर पंजीकृत हो चुके हैं।
एनडीडीबी डेयरी ईआरपी: गाय से ग्राहक तक डिजिटल श्रृंखला
एनडीडीबी डेयरी ईआरपी (NDERP) एक वेब-आधारित एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सिस्टम है, जो डेयरी और खाद्य तेल उद्योगों के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है। यह ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म पर आधारित है और इसमें वित्त, खरीद, इन्वेंट्री, बिक्री, उत्पादन और मानव संसाधन जैसे सभी प्रमुख मॉड्यूल शामिल हैं।
NDERP को एएमसीएस के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे दूध संग्रह से लेकर प्रसंस्करण और वितरण तक पूरी वैल्यू चेन डिजिटल हो जाती है। इसमें मास-बैलेंसिंग तकनीक का उपयोग कर डेयरी प्लांट्स में होने वाले नुकसान को भी कम किया जा रहा है।
INDERP और MNDERP: वितरकों के लिए डिजिटल सुविधा
iNDERP पोर्टल और mNDERP मोबाइल ऐप वितरकों को ऑर्डर, इनवॉइस, भुगतान और डिलीवरी ट्रैकिंग की सुविधा देते हैं। इससे दुग्ध संघों और वितरकों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है और व्यापारिक प्रक्रियाएं तेज व पारदर्शी बनी हैं।
सीमेन स्टेशन मैनेजमेंट सिस्टम: गुणवत्ता और ट्रेसिबिलिटी
सीमेन स्टेशन मैनेजमेंट सिस्टम (SSMS) फ्रोजन सीमेन डोज के उत्पादन और वितरण को मानकीकृत करता है। यह सिस्टम बैल की लाइफसाइकिल, सीमेन उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और बायोसिक्योरिटी तक की डिजिटल निगरानी करता है। वर्तमान में देश के 38 श्रेणीकृत सीमेन स्टेशन इस सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं।
आईएनएपीएच: फील्ड डेटा का सशक्त माध्यम
INAPH एप्लीकेशन पशुपालन से जुड़ी प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का रीयल-टाइम डेटा दर्ज करता है। इससे योजनाओं की प्रगति की निगरानी और मूल्यांकन आसान हुआ है।
इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS)
i-DIS डेयरी क्षेत्र में डेटा आधारित योजना और निर्णय लेने का मजबूत आधार बन चुकी है। वर्तमान में 198 दुग्ध संघ, 29 मार्केटिंग डेयरियां, 54 पशु आहार संयंत्र और 15 फेडरेशन इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। यह सिस्टम संगठनों को अपने प्रदर्शन की तुलना और विश्लेषण करने की सुविधा देता है।
मिल्क रूट ऑप्टिमाइजेशन: लागत में कटौती
एनडीडीबी ने जीआईएस आधारित मिल्क रूट ऑप्टिमाइजेशन शुरू किया है, जिससे दूध संग्रह और वितरण मार्गों को वैज्ञानिक ढंग से डिज़ाइन किया जा रहा है। इससे ईंधन, समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। विदर्भ, वाराणसी, असम, झारखंड और इंदौर जैसे क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
एनडीडीबी के नेतृत्व में डिजिटल तकनीक और सहकारी मॉडल का यह संगम भारत के डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। पारदर्शिता, ट्रेसिबिलिटी और दक्षता के साथ यह डिजिटल कायाकल्प न केवल किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि भारत को वैश्विक डेयरी नेतृत्व की ओर भी अग्रसर कर रहा है।