AI and Future Jobs or Children Education | AI के दौर में बच्चों का भविष्य बदलेगा? कोडिंग से ज्यादा जरूरी क्या होगा?

Tue 29-Sep-2026,01:30 PM IST +05:30

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AI and Future Jobs or Children Education | AI के दौर में बच्चों का भविष्य बदलेगा? कोडिंग से ज्यादा जरूरी क्या होगा? AI and Future Jobs or Children Education
  • AI के दौर में भविष्य की नौकरियों का अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण है।

  • बच्चों के लिए क्रिटिकल थिंकिंग और तार्किक सोच महत्वपूर्ण हो सकती है।

  • कोडिंग के साथ बदलती परिस्थितियों के अनुसार सीखने की क्षमता पर जोर दिया गया है।

Delhi / New Delhi :

एक समय बच्चों को कोडिंग सिखाने को भविष्य की नौकरियों के लिए सबसे जरूरी तैयारियों में गिना जाता था। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने इस सोच को चुनौती दी है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बच्चे कौन-सी तकनीकी स्किल सीखें, बल्कि यह भी है कि बदलती दुनिया में वे कैसे सोचेंगे, समस्याओं को कैसे समझेंगे और सही फैसले कैसे लेंगे।

रॉयटर्स के “The Big View” कार्यक्रम में अकादमिक और लेखक डैनियल सस्किंड ने इसी बदलती परिस्थिति पर चर्चा की। कार्यक्रम में उन्होंने होस्ट पीटर थाल लार्सन के साथ भविष्य की नौकरियों को लेकर हमारी पारंपरिक सोच पर सवाल उठाया। सस्किंड का कहना है कि आने वाले समय में कौन-सी नौकरियां मौजूद रहेंगी, इसका सटीक अनुमान लगाना आसान नहीं है।

उनके अनुसार, बच्चों को आज ऐसी किसी एक नौकरी के लिए तैयार करना, जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह भविष्य में महत्वपूर्ण होगी, एक अनिश्चित रणनीति हो सकती है। तकनीक और खास तौर पर AI जिस तेजी से बदल रहा है, उससे कई काम करने के तरीके बदल सकते हैं। ऐसे में शिक्षा का लक्ष्य केवल किसी खास पेशे के लिए प्रशिक्षण देना नहीं होना चाहिए।

इस चर्चा में क्रिटिकल थिंकिंग यानी आलोचनात्मक और तार्किक सोच को विशेष महत्व दिया गया है। इसका मतलब केवल जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि किसी जानकारी को समझना, उसके स्रोत और विश्वसनीयता पर विचार करना, अलग-अलग विकल्पों को देखना और फिर तर्क के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना है।

AI के दौर में यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि जब मशीनें कई तरह के तकनीकी और बौद्धिक काम करने में सक्षम होंगी, तब इंसानों की भूमिका क्या होगी। सस्किंड की चर्चा इसी व्यापक बदलाव की ओर ध्यान दिलाती है। उनके विचारों में भविष्य की अनिश्चितता को स्वीकार करते हुए ऐसी क्षमताओं पर ध्यान देने की बात सामने आती है, जो बदलती परिस्थितियों में भी उपयोगी रह सकें।

डैनियल सस्किंड ने इससे पहले “A World Without Work: Technology, Automation, and How We Should Respond” जैसी किताब में भी तकनीक, ऑटोमेशन और काम के भविष्य पर विचार किया है। उनकी नई किताब “What Should My Children Do? A Human’s Guide to the Age of AI” भी इसी सवाल को बच्चों और अभिभावकों के नजरिए से देखती है कि AI के दौर में अगली पीढ़ी को किस तरह तैयार किया जाए।

इस चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भविष्य के लिए शिक्षा को केवल तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं किया जा सकता। कोडिंग जैसी स्किल उपयोगी हो सकती है, लेकिन AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सवाल पूछने, विश्लेषण करने, तर्क करने और नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

यानी AI का दौर बच्चों के भविष्य को लेकर एक नई चुनौती सामने रख रहा है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि “भविष्य में कौन-सी नौकरी मिलेगी?”, बल्कि यह भी है कि “भविष्य चाहे जैसा हो, बच्चे उसके लिए सोचने और सीखने की क्षमता कैसे विकसित करें?”