जर्मनी में Gen Z का विद्रोह | 1.60 लाख युवा सड़कों पर उतरेंगे, सरकार से शिक्षा और महंगाई पर जवाब मांगेंगे

Sat 31-Oct-2026,01:10 PM IST +05:30

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जर्मनी में Gen Z का विद्रोह | 1.60 लाख युवा सड़कों पर उतरेंगे, सरकार से शिक्षा और महंगाई पर जवाब मांगेंगे Gen-Z Protest in Berlin
  • जर्मनी के 34 शहरों में 1.60 लाख से अधिक लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने का अनुमान है।

  • युवा शिक्षा में निवेश बढ़ाने, महंगाई से राहत और अनिवार्य सैन्य सेवा का विरोध कर रहे हैं।

  • जर्मनी के प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की उम्मीद जताई है, लेकिन चरमपंथी समूहों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।

Berlin / Berlin :

Berlin / यूरोप में युवाओं का गुस्सा अब एक नए देश तक पहुंच गया है। सर्बिया और फ्रांस के बाद अब जर्मनी में भी हजारों युवा सड़कों पर उतरने जा रहे हैं। सवाल है, क्या यह आंदोलन सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाला है?

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में शनिवार, 31 अक्टूबर को युवाओं का एक बड़ा प्रदर्शन होने जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक, देशभर में 1 लाख 60 हजार से अधिक लोग इन प्रदर्शनों में शामिल हो सकते हैं। यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, बढ़ती महंगाई और युवाओं पर पड़ते आर्थिक दबाव के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है।

इस आंदोलन का नेतृत्व Gen Z regelt नाम का अभियान समूह कर रहा है। इसका अर्थ है—Gen Z अब खुद जिम्मेदारी संभालेगी। प्रदर्शन बर्लिन, फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख सहित जर्मनी के 34 शहरों में आयोजित किए जाने की योजना है।

इस आंदोलन के पीछे यूरोप में इस साल हुए Gen Z प्रदर्शनों की लहर को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। सर्बिया में छात्र आंदोलन ने राजनीतिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, फ्रांस में युवाओं के प्रदर्शन कई जगह हिंसा, लूटपाट और दंगों में बदल गए। अब जर्मनी में भी युवाओं की नाराजगी सड़कों पर दिखाई देने वाली है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा पर अधिक सरकारी निवेश, जीवनयापन की बढ़ती लागत से राहत और अनिवार्य सैन्य सेवा का विरोध शामिल है। युवाओं का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है और लगातार कटौती तथा अतिरिक्त आर्थिक बोझ का दबाव उन पर बढ़ रहा है।

म्यूनिख में होने वाली रैली में भाषण देने वाले 18 वर्षीय युवक स्टीव ने चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सरकार पर सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि सरकार ने युवाओं की चिंताओं का कोई प्रभावी जवाब नहीं दिया है। उसने कहा कि जब तक उनकी आवाज नहीं सुनी जाएगी, वे अपने प्रदर्शन और विरोध का अधिकार इस्तेमाल करते रहेंगे।

हालांकि, जर्मनी के प्रशासन ने इन प्रदर्शनों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जाहिर की हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि प्रदर्शन मुख्य रूप से शांतिपूर्ण रहेंगे, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि चरमपंथी समूह इस आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

जर्मनी के संघीय गृह मंत्रालय के अनुसार, कुछ वामपंथी चरमपंथी समूहों और विदेशी चरमपंथी संगठनों से जुड़े समूहों ने भी आंदोलन के समर्थन में लोगों को जुटाने की कोशिश की है। हेस्से राज्य के गृह मंत्री रोमन पोसेक ने फ्रांस में हुई हिंसा का उदाहरण देते हुए कहा कि जर्मनी को ऐसी स्थिति से बचना चाहिए।

बर्लिन के मशहूर शॉपिंग क्षेत्र कुर्फ्यूरस्टेंडाम में कुछ दुकानदारों ने संभावित हिंसा की आशंका के चलते अपनी दुकानों की खिड़कियों को सुरक्षित कर लिया है और जल्दी बंद करने की योजना बनाई है।

लेकिन इस आंदोलन को लेकर एक दूसरा सवाल भी उठ रहा है। क्या यह वास्तव में युवाओं का स्वतंत्र आंदोलन है? जर्मनी के राष्ट्रीय छात्र संगठन BSK ने Gen Z regelt अभियान से खुद को अलग कर लिया है। संगठन ने कहा है कि वह छात्रों की वास्तविक समस्याओं का समर्थन करता है, लेकिन इस विशेष पहल का हिस्सा नहीं है। BSK ने 20 नवंबर को अलग से विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई है।

बर्लिन की टेक्निकल यूनिवर्सिटी के छात्र सीन बेकर भी प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की इमारतों और पढ़ाई के माहौल की हालत बेहद खराब है। छात्रों को नियमित रूप से ऐसी इमारतों में पढ़ना पड़ता है, जो उन्हें किसी परित्यक्त भवन जैसी दिखाई देती हैं।

दरअसल, जर्मनी इस समय आर्थिक विकास की सुस्ती, पेंशन व्यवस्था पर बढ़ते दबाव और सार्वजनिक सेवाओं की चुनौतियों का सामना कर रहा है। बुजुर्ग आबादी के सेवानिवृत्त होने और कामकाजी आबादी घटने से भी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

अब देखना होगा कि जर्मनी की सरकार युवाओं की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और शनिवार का यह प्रदर्शन कितना शांतिपूर्ण रहता है। फिलहाल, यह आंदोलन यूरोप में नई पीढ़ी की बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक चिंताओं को सामने ला रहा है।