डोडा सड़क हादसा: भारतीय सेना के 10 जवान शहीद, खाई में गिरे बख्तरबंद वाहन से रेस्क्यू पूरा
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Doda Accident
डोडा हादसे में सेना के 10 जवान शहीद.
खन्नी टॉप पर 200 फुट गहरी खाई में गिरा वाहन.
घायलों का इलाज जारी, देशभर में शोक.
Doda / जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से आई यह खबर पूरे देश को गहरे शोक में डुबो देने वाली है। भद्रवाह–चंबा अंतरराज्यीय सड़क पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में भारतीय सेना के दस जवानों ने देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह दुर्घटना 9000 फीट की ऊंचाई पर स्थित खन्नी टॉप के पास उस समय हुई, जब आतंकवाद विरोधी अभियान के लिए जा रहे जवानों का बुलेटप्रूफ वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 200 फुट गहरी खाई में जा गिरा।
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, सेना का बख्तरबंद वाहन ‘कैस्पर’ खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्ते के बीच आगे बढ़ रहा था। दोपहर के समय अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क से फिसलकर गहरी खाई में जा गिरा। यह इलाका न केवल बेहद ऊंचाई पर स्थित है, बल्कि संकरी सड़कों और तीखे मोड़ों के कारण यहां सफर हमेशा जोखिम भरा माना जाता है। हादसे के वक्त वाहन में सवार सभी जवान अपनी नई पोस्टिंग पर जा रहे थे और पूरी तरह ड्यूटी मोड में थे।
बचाव अभियान और घायलों की स्थिति
हादसे की सूचना मिलते ही सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया। दुर्गम क्षेत्र और खराब मौसम के बावजूद रेस्क्यू टीम ने साहस दिखाते हुए खाई में उतरकर जवानों को बाहर निकाला। शुरुआती तौर पर चार जवानों के शव बरामद किए गए, जबकि 17 जवान गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाए गए। दुर्भाग्यवश, बाद में इलाज के दौरान छह और जवानों ने दम तोड़ दिया, जिससे शहीदों की संख्या बढ़कर दस हो गई।
घायलों में से 10 जवानों को बेहतर और विशेष इलाज के लिए उधमपुर स्थित कमांड अस्पताल एयरलिफ्ट किया गया है। वहीं एक जवान भद्रवाह के उप-जिला अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में है और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
शहीद हुए जवानों के नाम
इस हादसे में जिन वीर सैनिकों ने अपने प्राण देश के नाम किए, उनके नाम राष्ट्र सदैव सम्मान के साथ याद रखेगा—
- सिपाही मोनू – 72 आर्म्ड रेजिमेंट
- सिपाही जोबनजीत सिंह – 8 कैवेलरी
- सिपाही मोहित – 72 आर्म्ड रेजिमेंट
- डीएफआर शैलेन्द्र सिंह भदोरिया – 52 आर्म्ड रेजिमेंट
- सिपाही समीरन सिंह – 4 बिहार
- सिपाही प्रदुम्न
- सिपाही लोहार – 4 बिहार
- सिपाही सुधीर नरवाल – 72 आर्म्ड रेजिमेंट
- नायक हरे राम कुंवर – 4 बिहार
- सिपाही अजय लकड़ा – 4 बिहार
- सिपाही रिंखिल बलियान – 72 आर्म्ड रेजिमेंट
इन नामों के पीछे सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि परिवारों के सपने, त्याग और देश के प्रति अटूट समर्पण छिपा हुआ है।
घायल हुए जवान
इस हादसे में घायल हुए जवानों में—
नायक जेपी सिंह, जवान अनूप सिंह, नीरज कुमार, अभिमन्यु कुमार सिंह, अमन, शंकर कुमार, नायब सूबेदार नागेश कुमार, सिपाही राकेश कुमार, सिपाही शंकर कुमार और संदीप कुमार शामिल हैं। सभी का इलाज जारी है और सेना लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
सेना का बयान
जम्मू स्थित सेना की व्हाइट नाइट कोर ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सेना के अनुसार, खराब मौसम और खतरनाक पहाड़ी इलाके से गुजरते समय वाहन सड़क से फिसल गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जवान पूरी सतर्कता के साथ अपने कर्तव्य पर जा रहे थे, लेकिन परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं।
देश के शीर्ष नेताओं ने जताया शोक
इस हादसे पर देश के शीर्ष नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि डोडा में हुई दुर्घटना से वह अत्यंत दुखी हैं, जिसमें देश ने अपने बहादुर सैनिकों को खो दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र उनके बलिदान को सदा याद रखेगा और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और किरेन रिजिजू ने भी इस घटना को लेकर शोक व्यक्त किया। किरेन रिजिजू ने कहा कि देश इन वीर जवानों की निस्वार्थ सेवा को कभी नहीं भूलेगा और शोक संतप्त परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इसे हृदयविदारक और असहनीय पीड़ा देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र हमेशा इन जवानों की कर्तव्यनिष्ठा का ऋणी रहेगा। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
देश की भावनाएं और परिवारों का दर्द
डोडा हादसे ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि ऐसे कठिन और जोखिम भरे सफर में भी होती है। जिन परिवारों ने अपने बेटों, भाइयों और पतियों को खोया है, उनके लिए यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती। पूरा देश इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है।
एक अमर बलिदान
ये जवान किसी युद्ध में नहीं, बल्कि कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए। उनका बलिदान इस बात का प्रतीक है कि भारतीय सेना का हर कदम, हर सफर और हर मिशन देश के लिए समर्पित होता है। डोडा की यह त्रासदी भले ही शब्दों में बयान न की जा सके, लेकिन इन वीरों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा और साहस का मार्ग दिखाती रहेगी।
ॐ शांति। राष्ट्र अपने वीर सपूतों को नमन करता है।