नेपाल चुनाव में बड़ा उलटफेर: बालेन शाह की पार्टी की ऐतिहासिक जीत, PM बनने की राह साफ

Mon 09-Mar-2026,10:54 PM IST +05:30

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नेपाल चुनाव में बड़ा उलटफेर: बालेन शाह की पार्टी की ऐतिहासिक जीत, PM बनने की राह साफ Balen Shah Nepal Election
  • नेपाल चुनाव में बालेन शाह की पार्टी का शानदार प्रदर्शन।

  • Gen Z आंदोलन के समर्थन से पुरानी पार्टियों को मिली चुनौती।

  • बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत।

Central Region / Kathmandu :

Nepal / नेपाल की राजनीति में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। 35 वर्षीय बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरानी राजनीतिक पार्टियों के लंबे वर्चस्व को चुनौती दे दी है। अब तक लगभग एक चौथाई सीटों की गिनती पूरी हो चुकी है और आरएसपी करीब 120 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है। इस नतीजे के बाद बालेन शाह के नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।

Gen Z आंदोलन ने बदली राजनीतिक तस्वीर
बालेन शाह की इस जीत के पीछे युवाओं का बड़ा योगदान माना जा रहा है। दरअसल, नेपाल में पिछले साल हुए Gen Z आंदोलन ने देश की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया था। युवा मतदाताओं ने पारंपरिक राजनीतिक दलों से नाराजगी जताते हुए नए विकल्प की तलाश शुरू की थी। इसी माहौल का फायदा बालेन शाह और उनकी पार्टी को मिला।

पूर्व रैपर रह चुके बालेन शाह ने अपनी टेक्नोक्रेटिक सोच और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के जरिए युवाओं के बीच खास पहचान बनाई। उनकी पार्टी आरएसपी ने तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली जैसे बड़े नेताओं को भी चुनाव में पीछे छोड़ दिया। इससे साफ हो गया कि नेपाल की जनता अब पुराने राजनीतिक ढांचे से बदलाव चाहती है।

सोशल मीडिया और डिजिटल रणनीति का असर
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की सबसे बड़ी ताकत उसकी डिजिटल रणनीति रही है। पार्टी ने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से सीधे संवाद किया और खुद को एक नई, पारदर्शी और टेक्नोक्रेटिक पार्टी के रूप में पेश किया।

चार साल से भी कम समय पहले बनी इस पार्टी ने बेहद कम समय में बड़ी राजनीतिक ताकत हासिल कर ली है। आरएसपी के उम्मीदवारों की औसत उम्र भी नेपाल की पारंपरिक तीन बड़ी पार्टियों की तुलना में काफी कम है। यही वजह है कि युवा मतदाताओं ने इस पार्टी पर भरोसा जताया।

काठमांडू के मेयर के रूप में लोकप्रियता
बालेन शाह इससे पहले काठमांडू महानगरपालिका के मेयर रह चुके हैं और अपने कामों को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं। मेयर के रूप में उन्होंने शहर में कचरे की समस्या से निपटने और स्कूलों की व्यवस्था सुधारने जैसे कई काम किए। इसी कारण उन्हें बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा।

हालांकि उनका अंदाज काफी बेबाक और आक्रामक माना जाता है। कई मौकों पर उन्होंने नेपाल के राजनीतिक तंत्र के साथ-साथ भारत, चीन और अमेरिका जैसी बड़ी शक्तियों की नीतियों पर भी खुलकर टिप्पणी की है।

क्या पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाएंगे?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बालेन शाह प्रधानमंत्री बनने के बाद अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे। नेपाल के राजनीतिक इतिहास में अब तक कोई भी चुनी हुई सरकार पूरे पांच साल तक टिक नहीं पाई है।

बालेन शाह की पार्टी के नेता रवि लमिछाने भी कई बार चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) प्रोजेक्ट की आलोचना कर चुके हैं, जिससे भविष्य में नेपाल की विदेश नीति को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं।

मैथिल भाषी प्रधानमंत्री बनने की संभावना
35 वर्षीय बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने पर एक और ऐतिहासिक रिकॉर्ड बन सकता है। वह नेपाल के पहले मैथिल भाषी प्रधानमंत्री बनेंगे। उनका मूल निवास मधेश प्रदेश के महोत्तरी जिले के एकडारा क्षेत्र में है। उन्होंने अपनी शिक्षा भारत के कर्नाटक में प्राप्त की है।

चुनाव प्रचार के दौरान बालेन शाह ने जनकपुर में मैथिली भाषा में जनसभा को संबोधित करते हुए खुद को “मधेशी छौरा” बताया था। उनकी यही पहचान और युवा छवि उन्हें नेपाल की राजनीति में एक नए बदलाव के प्रतीक के रूप में स्थापित कर रही है।