IIT DELHI में पावर सेक्टर के लिए Centre Of Excellence
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आईआईटी दिल्ली में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारत की विद्युत विनियामक क्षमता को मजबूत करने और नीति–अनुसंधान समन्वय बढ़ाने का मंच बनेगा।
सीईआरसी और ग्रिड इंडिया के सहयोग से यह केंद्र नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड ऑपरेशन और बाजार सुधारों पर साक्ष्य-आधारित समाधान देगा।
DELHI/ IIT DELHI में स्थापित यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तेजी से बढ़ती बिजली मांग, नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े पैमाने पर एकीकरण, प्रतिस्पर्धी विद्युत बाजारों और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग से उत्पन्न चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। यह केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर विनियामक अनुसंधान, क्षमता निर्माण, परामर्श सहायता और ज्ञान प्रसार का प्रमुख केंद्र बनेगा।
केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने उद्घाटन के दौरान कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा, उपभोक्ता-केंद्रित सुधारों और प्रतिस्पर्धी बाजारों की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में मजबूत और ज्ञान-आधारित विनियमन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र किफायती बिजली, टिकाऊ विकास और दक्षता—इन तीनों के बीच संतुलन बनाने में नीति निर्माताओं की मदद करेगा।
आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने इसे एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक–नीतिगत साझेदारी बताते हुए कहा कि यह केंद्र बिजली क्षेत्र को टिकाऊ, किफायती और भविष्य के लिए तैयार बनाने हेतु नया ज्ञान और विश्लेषण विकसित करेगा। साथ ही यह विनियामक संस्थानों और क्षेत्र के पेशेवरों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी चलाएगा।
सीईआरसी के अध्यक्ष श्री जिष्णु बरुआ ने कहा कि सशक्त विनियमन के लिए ठोस आंकड़ों, विश्लेषण और दीर्घकालिक सोच की जरूरत होती है। यह केंद्र साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करेगा। वहीं ग्रिड इंडिया के चेयरमैन एवं एमडी श्री एस. सी. सक्सेना ने कहा कि इस पहल से ग्रिड संचालन का व्यावहारिक अनुभव सीधे विनियामक अनुसंधान और बाजार डिजाइन में समाहित हो सकेगा।
यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बहुविषयी अनुसंधान पर केंद्रित होगा, जिसमें विद्युत नियमन, मार्केट डिजाइन, ग्रिड ऑपरेशन, ऊर्जा संक्रमण, डीकार्बनाइजेशन, डिजिटलीकरण, ऊर्जा भंडारण, डिमांड रिस्पॉन्स और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी उभरती तकनीकें शामिल हैं। साथ ही यह नीति निर्माताओं और सिस्टम ऑपरेटरों को विश्लेषणात्मक मॉडल और प्रशिक्षण के जरिए दीर्घकालिक सहयोग प्रदान करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत के पावर सेक्टर में सुधारों को नई दिशा देगी और एक मजबूत, अनुकूल एवं भविष्य-उन्मुख विनियामक ढांचे के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी।