छत्तीसगढ़ स्कूलों में परीक्षा टकराव से बढ़ा दबाव
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Chhattisgarh School Exam Schedule Clash 2026
माशिम और DPI के परीक्षा आदेशों में तालमेल की कमी से छत्तीसगढ़ के स्कूलों में एक ही दिन दो परीक्षाओं की स्थिति बनी।
शिक्षक संगठनों ने शिक्षा विभाग से परीक्षा तिथियों में संशोधन कर समन्वयपूर्ण कार्यक्रम लागू करने की मांग की।
Raipur/ छत्तीसगढ़ के सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में इन दिनों शिक्षकों और विद्यार्थियों पर परीक्षा का दोहरा दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी अलग-अलग आदेशों के कारण स्कूलों में परीक्षा कार्यक्रमों का टकराव हो गया है, जिससे शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
माशिम द्वारा पहले ही दिसंबर माह में 10वीं और 12वीं की प्रायोगिक परीक्षाओं की समय-सारिणी जारी की जा चुकी थी। इसके तहत स्कूलों को निर्देश दिया गया था कि 1 से 20 जनवरी के बीच प्रायोगिक परीक्षाएं पूरी कर अंक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। इसी दौरान DPI ने प्री-बोर्ड परीक्षाओं को लेकर नया आदेश जारी कर सभी जिलों को 15 जनवरी तक परीक्षाएं संपन्न कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दे दिए।
दोनों विभागों के आदेशों में समन्वय की कमी के चलते कई स्कूलों को एक ही दिन में दो-दो परीक्षाएं आयोजित करनी पड़ रही हैं। इससे न केवल कार्यदिवस कम पड़ रहे हैं, बल्कि विद्यालय प्रबंधन पर भी अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है।
10वीं और 12वीं की प्रायोगिक परीक्षाओं में बाह्य परीक्षक की अनिवार्यता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। बाह्य परीक्षक दूसरे स्कूलों से आते हैं, जिसके कारण संबंधित शिक्षकों की अपनी कक्षाओं की परीक्षाएं, मूल्यांकन कार्य और नियमित शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई विद्यालयों में शिक्षक एक साथ परीक्षा संचालन, उत्तरपुस्तिका जांच और प्रायोजना कार्य संभालने को मजबूर हैं।
लगातार परीक्षाओं के चलते विद्यार्थियों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय न मिल पाने से छात्र असमंजस में हैं। पालकों में भी बच्चों के स्वास्थ्य और शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर चिंता गहराती जा रही है।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने परीक्षा तिथियों में बदलाव की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि माशिम और DPI के बीच तालमेल के अभाव का सीधा असर शिक्षकों और विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। अधिकांश स्कूलों में बाह्य परीक्षकों की उपलब्धता के कारण 5 जनवरी के बाद ही प्रायोगिक परीक्षाएं शुरू हो सकीं, जबकि प्री-बोर्ड परीक्षा के लिए अलग तैयारी आवश्यक होती है। वर्तमान समय-सारिणी व्यवहारिक नहीं है।
शिक्षक संगठनों ने शिक्षा विभाग से अपील की है कि परीक्षा कार्यक्रमों में समन्वय स्थापित कर तिथियों में संशोधन किया जाए, ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रों का मानसिक संतुलन बनाए रखा जा सके।