MS University के 75वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु का युवाओं को संदेश

Wed 23-Sep-2026,11:23 PM IST +05:30

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MS University के 75वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु का युवाओं को संदेश MS University Vadodara 75th Convocation
  • राष्ट्रपति मुर्मु ने बहुविषयक शिक्षा की जरूरत पर जोर दिया।

  • विद्यार्थियों से शिक्षा और ज्ञान का उपयोग समाजहित में करने की अपील की।

  • 2047 के विकसित भारत में युवाओं और विश्वविद्यालयों की भूमिका अहम बताई।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / क्या शिक्षा का असली मकसद सिर्फ डिग्री हासिल करना है? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वडोदरा में विद्यार्थियों से कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज और देश तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं को जिम्मेदारी, संवेदना और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 23 सितंबर 2026 को गुजरात के वडोदरा में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के 75वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय की 75 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान ने ज्ञान की विभिन्न धाराओं को साथ लेकर आगे बढ़ने का काम किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज के दौर की जटिल समस्याओं का समाधान किसी एक विषय तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों के ज्ञान को साथ लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज को वैज्ञानिक की जिज्ञासा, कलाकार की संवेदनशीलता, इतिहासकार की दृष्टि, अर्थशास्त्री की समझ और समाजशास्त्री की चेतना—इन सभी की आवश्यकता है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थान बहुविषयक शिक्षा और शोध को आगे बढ़ाने में लगातार सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

डिग्री के साथ उद्देश्य समझना जरूरी
उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि उनकी शिक्षा और ज्ञान का उद्देश्य क्या है। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने कार्यक्षेत्र में देश और समाज के हित को प्राथमिकता देंगे, तो इसका लाभ समाज के साथ-साथ उन्हें भी मिलेगा।

राष्ट्रपति ने शिक्षा को केवल व्यक्तिगत करियर बनाने का माध्यम मानने के बजाय सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने पर जोर दिया।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इंजीनियरों को ऐसी तकनीक विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए, जिससे लोगों का जीवन बेहतर हो। डॉक्टरों को चिकित्सा को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि सेवा के रूप में देखना चाहिए। वैज्ञानिकों से मानवता के हित में समस्याओं के समाधान की अपेक्षा है।

इसी तरह कलाकार और साहित्यकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता बढ़ा सकते हैं। उद्यमियों को केवल आर्थिक लाभ तक सीमित न रहकर रोजगार और नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम करना चाहिए।

शिक्षकों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को भी संदेश
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक ऐसी पीढ़ी तैयार करने का प्रयास करें, जो देश की विरासत और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बना सके। वहीं, सार्वजनिक जीवन में आने वाले युवाओं को पद को अधिकार के बजाय जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए।

उनका यह संदेश दीक्षांत समारोह में मौजूद विद्यार्थियों के लिए करियर के साथ सामाजिक दायित्व की भूमिका को भी रेखांकित करता है।

2047 के विकसित भारत में युवाओं की भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सभी तक होना जरूरी है।

उन्होंने विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल को मानव कल्याण से जोड़ने, अवसरों की समानता सुनिश्चित करने तथा महिलाओं और युवाओं की पूरी क्षमता का उपयोग करने की जरूरत बताई।

राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य ऐसा देश बनाने से जुड़ा है, जहां हर नागरिक सम्मान के साथ जीवन जी सके। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने में विश्वविद्यालयों और युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

75वें दीक्षांत समारोह का यह अवसर विद्यार्थियों के लिए डिग्री हासिल करने के साथ-साथ अपने ज्ञान को समाज और राष्ट्र के व्यापक हित में इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी का संदेश भी लेकर आया।