महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का 29वां स्थापना दिवस, 7 से 10 जनवरी तक विविध कार्यक्रम

Sun 04-Jan-2026,09:38 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का 29वां स्थापना दिवस, 7 से 10 जनवरी तक विविध कार्यक्रम Mahatma-Gandhi-Hindi-University-Foundation-Day
  •  राष्ट्रीय पुस्तक मेला और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन.

  •  स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय मंत्रियों की सहभागिता.

  •  मलखंब, सांस्कृतिक कार्यक्रम और फूड फेस्टिवल.

Maharashtra / Wardha :

वर्धा/ 4 जनवरी 2026: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय अपना 29वां स्थापना दिवस 7 से 10 जनवरी तक विभिन्‍न कार्यक्रमों के साथ मना  रहा है। 29वें स्‍थापनोत्‍सव का प्रारंभ 08 जनवरी को ध्‍वजारोहण के साथ होगा। पूर्वांह्न 11:00 बजे स्‍थापना दिवस का मुख्‍य कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर मुख्‍य अतिथि माननीय केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी (ऑनलाइन) होंगे तथा विशिष्‍ट अतिथि माननीय केंद्रीय पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ होंगे। इस अवसर पर कार्य परिषद् के सदस्‍य प्रो. सुरेन्‍द्र दुबे एवं वरिष्‍ठ पत्रकार श्री अनंत विजय सारस्‍वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा करेंगी।
‘पुस्‍तक संस्‍कृति’ को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से विश्‍वविद्यालय स्थित बोधिसत्‍व डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर समता भवन प्रांगण में 07 से 10 जनवरी तक राष्‍ट्रीय पुस्‍तक मेले का आयोजन किया जाएगा। पुस्‍तक मेले का उद्धाटन 7 जनवरी को सायं 5:00 बजे प्रख्‍यात लेखिका डॉ. क्षमा कौल द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर प्रख्‍यात लेखक डॉ. भूषण भावे की उपस्थिति रहेगी। स्‍थापना दिवस के अवसर पर ही 08, 09 एवं 10 जनवरी को उत्‍तर प्रदेश हिंदी संस्‍थान, लखनऊ एवं विश्‍वविद्यालय के संयुक्‍त तत्वावधान में ‘भारतीय साहित्‍य में एकात्‍मता (हिंदी एवं भारतीय भाषा साहित्‍य महोत्‍सव)’ विषय पर अंतरराष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्‍ठी में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्‍वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी (ऑनलाइन), केंद्रीय हिंदी संस्‍थान, आगरा के उपाध्‍यक्ष प्रो. सुरेन्‍द्र दुबे, वरिष्‍ठ पत्रकार श्री अनंत विजय, उत्‍तर प्रदेश हिंदी संस्‍थान की प्रधान संपादक डॉ. अमिता दुबे, जेएनयू से प्रो. पूनम कुमारी, हिंदी एवं तकनीकी विशेषज्ञ प्रो. बालेन्‍दु शर्मा दाधीच (ऑनलाइन), जेएनयू के स्‍कूल ऑफ संस्‍कृत एण्‍ड इन्डिक स्‍टडीज के प्रो. गिरीश नाथ झा (ऑनलाइन),  आदि विद्वान शिरकत करेंगे।  यह जानकारी कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने  रविवार, 4 जनवरी को नागार्जुन अतिथि गृह में पत्रकार वार्ता में दी।  पत्रकार वार्ता में कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान, मीडिया समिति की संयोजक डॉ. रेणु कुमारी, जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे, समिति के सदस्‍य सचिव डॉ. अमित विश्‍वास व सदस्‍य डॉ. संदीप वर्मा सहित प्रिंट एवं इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने बताया कि स्‍थापना दिवस के अवसर पर 9 जनवरी को  मेजर ध्‍यानचंद क्रीड़ा स्‍थल पर सायं 06:00 बजे से डिग्री कॉलेज ऑफ फिजिकल एज्‍युकेशन, श्री हनुमान व्‍यायाम प्रसारक मंडल,अमरावती के कलाकारों द्वारा मलखंब का प्रदर्शन किया जाएगा। सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी इस दौरान किया जाएगा। 10 जनवरी को मेजर ध्‍यानचंद क्रीड़ा स्‍थल पर सायं 05:00 बजे से फूड फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। उन्‍होंनै कहा कि विकसित भारत के लक्ष्‍य को साकार करने की दिशा में युवा शक्ति की बड़ी भूमिका है और हमारी जिम्‍मेदारी है कि उन्‍हें दीक्षित कर भावी भारत के लिए तैयार करें। विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए हम कार्यशालाएं आयोजित की गयी है। विश्‍वविद्यालय में पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के साथ-साथ 15 राज्‍यों के विद्यार्थी अध्‍ययन कर रहे है।

विदित है कि विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना संसद द्वारा 1996 ई. में पारित अधिनियम के अंतर्गत 1997 ई. में केंद्रीय विश्‍वविद्यालय एवं भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय विश्‍वविद्यालय के रूप में महात्मा गांधी की कर्मस्थली वर्धा में की गई।

हिंदी भाषा और साहित्य की उन्नति के साथ ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों में अध्ययन, अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए एक समर्थ माध्यम के रूप में हिंदी का सम्यक विकास इसका प्रधान लक्ष्‍य है। देश-दुनिया की भाषाओं के साथ हिंदी के तुलनात्‍मक अध्‍ययन तथा उनसे अधुनातन अनुशासनों की अद्यतन ज्ञान-सामग्री का हिंदी में अनुवाद और विकास भी विश्‍वविद्यालय की प्राथमिकता है। आज के बहुभाषा-भाषी विश्‍व में एक समर्थ अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी की पहचान स्‍थापित करना विश्‍वविद्यालय का लक्ष्‍य है। विश्‍वविद्यालय में भाषा विद्यापीठ, साहित्‍य विद्यापीठ, संस्‍कृति विद्यापीठ, अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, शिक्षा विद्यापीठ, प्रबंधन विद्यापीठ एवं विधि विद्यापीठ के अंतर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर शोध और डिप्लोमा के पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कोलकाता, प्रयागराज तथा रिद्धपुर में विश्‍वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र चल रहे हैं जहाँ कई पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। चीनी, जापानी, फ्रेंच और स्‍पेनिश भाषाओं का पठन-पाठन विश्‍वविद्यालय में हो रहा है। हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी और भारतीय भाषाएं जैसे मराठी, संस्‍कृत का भी पठन-पाठन जारी है।  विश्‍वविद्यालय में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत सीयूईटी के माध्‍यम से प्रवेश प्रक्रिया जारी है। विश्‍वविद्यालय ने अपने अकादमिक गतिविधियों का विस्‍तार करते हुए अनेक शैक्षणिक संस्‍थानों के साथ समझौता ज्ञापन किये हैं और भविष्‍य में विश्‍वविद्यालयों और अन्‍य संस्‍थानों के साथ समझौता ज्ञापन करने का प्रस्‍ताव है।

इस विश्‍वविद्यालय की शैक्षिक प्रक्रिया में संचार की नई तकनीकी, कल्‍पनाशीलता तथा अनुभवपरक सीखने के अवसरों के साथ-साथ सामाजिक जीवन से जुड़ने को भी महत्‍व दिया जाता है। यहाँ का प्राकृतिक परिवेश और अध्‍ययन के लिए उपलब्‍ध सुविधाओं के साथ विद्यार्थी अध्‍ययन करते हैं। भारत के विभिन्‍न राज्‍यों के विद्यार्थियों के साथ-साथ विदेश के विशेषत: चीन, जापान, थाईलैण्‍ड, मॉरिशस, श्रीलंका, रुस, बेल्जियम आदि देशों के विद्यार्थी अध्‍ययन के लिए आते हैं। मौलिक और मानक ग्रंथों का प्रकाशन, दुर्लभ पांडुलिपियों, चित्रों, दस्तावेज़ों का संग्रह, विश्‍वकोशों और संदर्भकोशों का निर्माण आदि विश्‍वविद्यालय की अनूठी योजनाएँ हैं। विश्‍वविद्यालय 'बहुवचन' और पुस्तक-वार्ता' नामक दो महत्वपूर्ण पत्रिकाएँ भी प्रकाशित करता है। विश्‍वविद्यालय में एक महत्वाकांक्षी ऑनलाइन पोर्टल है- हिंदी समय डॉट कॉम। जो हिंदी जगत में अत्यंत परिचित और प्रतिष्ठित है। 'हिंदी समय' पर अब तक लगभग बारह लाख से अधिक पृष्ठों की सामग्री प्रस्तुत हो चुकी है। कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान ने विश्‍वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों सहित वर्धा के हिंदी प्रेमियों से अधिकाधिक संख्या में सहभागी होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।