मौसम विभाग ने बताया कि रविवार का दिन पिछले पांच वर्षों में नवंबर माह का सबसे ठंडा दिन रहा। उत्तर भारत में पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और तेज़ उत्तर-पश्चिमी हवाएँ दिल्ली के तापमान में गिरावट का मुख्य कारण मानी जा रही हैं। रात में ठंड और ज्यादा बढ़ी, जब न्यूनतम तापमान अचानक गिरकर आठ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह पिछले तीन वर्षों में नवंबर महीने का सबसे कम न्यूनतम तापमान है।
आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक का सबसे कम न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस रहा है, जबकि पिछले साल यह संख्या 9.5 डिग्री थी। 2023 में न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री, 2022 में 12.3 डिग्री और 2021 में 11.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस बार मासिक औसत न्यूनतम तापमान भी सामान्य से नीचे रहा और 11.5 डिग्री पर दर्ज किया गया, जो बताता है कि इस साल ठंड का असर पहले ही शुरू हो गया है।
पिछले साल नवंबर का औसत न्यूनतम तापमान 14.7 डिग्री सेल्सियस था। वहीं 2023 में यह 12 डिग्री, 2022 में 12.3 डिग्री और 2021 में 11.9 डिग्री दर्ज हुआ था। इन आंकड़ों की तुलना से साफ है कि 2024 में नवंबर की ठंड अपने पिछले वर्षों की तुलना में अधिक तीव्र है।
दिल्ली में ठंड का यह समय कई चुनौतियाँ भी लेकर आया है। तापमान गिरने से सुबह और देर रात के समय गलन बढ़ गई है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों के लिए यह अचानक बढ़ी ठंड चिंता का कारण बन रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी सलाह दी है कि लोग इस मौसम में खास सावधानी बरतें और मौसम के अनुरूप कपड़े पहनकर बाहर निकलें।
मौसम विभाग ने सोमवार के लिए घने कोहरे की संभावना जताई है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में सुबह के समय दृश्यता कम रहने की आशंका है, जो यातायात को प्रभावित कर सकती है। हवाई यात्रा और रेल सेवाओं पर भी कोहरे का असर पड़ सकता है।
राजधानी में बढ़ी ठंड और कोहरे का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ों में जारी बर्फबारी और हवाओं की दिशा में बदलाव के कारण दिल्ली में ठंड का असर और तेज़ होने की संभावना है। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।