ताली बजाइए, सेहत को ताल दीजिए: आसान अभ्यास के बड़े फायदे
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Clapping-Exercise
ताली बजाने से रक्त संचार और ऊर्जा स्तर में सुधार.
हाथों, उंगलियों और जोड़ों की सक्रियता में मदद.
मानसिक तनाव कम करने में सहायक सरल अभ्यास.
Nagpur / अक्सर ताली बजाना खुशी, उत्साह या किसी उपलब्धि की सराहना से जोड़कर देखा जाता है। समारोह हो, धार्मिक आयोजन हो या किसी मंचीय कार्यक्रम का समापन, ताली अपने आप बजने लगती है। लेकिन हाल के वर्षों में ताली बजाने को केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सेहत से जुड़ी एक उपयोगी शारीरिक गतिविधि के रूप में भी देखा जाने लगा है। आयुर्वेदिक मान्यताओं और कुछ आधुनिक अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि नियमित रूप से ताली बजाना शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर में हाथों और हथेलियों का विशेष महत्व है। हथेलियों में शरीर के विभिन्न अंगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदु होते हैं, जिन्हें ऊर्जा केंद्र या प्रेशर प्वाइंट माना जाता है। जब दोनों हाथों को आपस में मिलाकर ताली बजाई जाती है, तो इन बिंदुओं पर दबाव पड़ता है। माना जाता है कि इससे शरीर की आंतरिक ऊर्जा सक्रिय होती है और रक्त संचार बेहतर होता है। इसी कारण ताली बजाने को एक सरल लेकिन प्रभावी क्रिया के रूप में देखा जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ताली बजाने से हाथों और उंगलियों की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। इससे हाथों में जकड़न कम होती है और जोड़ों में लचीलापन बना रहता है। विशेषकर बढ़ती उम्र में जब उंगलियों और कलाई में अकड़न की समस्या सामने आने लगती है, तब ताली बजाना एक आसान व्यायाम के रूप में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही हथेलियों में मौजूद नसों पर हल्का दबाव पड़ने से तंत्रिका तंत्र को भी सक्रियता मिलती है।
कुछ शोधों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार ताली बजाने से रक्त संचार में सुधार हो सकता है। जब दोनों हथेलियां आपस में टकराती हैं, तो उत्पन्न कंपन शरीर की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं तक असर डालता है। इससे ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और शरीर के अंगों तक पोषण पहुंचने में मदद मिलती है। यही कारण है कि इसे हृदय स्वास्थ्य से भी जोड़कर देखा जाता है, हालांकि डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि यह किसी दवा या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है, बल्कि सहायक गतिविधि हो सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी ताली बजाना उपयोगी माना जाता है। खुशी के क्षणों में ताली बजाने से मस्तिष्क में सकारात्मक रसायनों का स्राव बढ़ता है, जिससे तनाव और चिंता में कमी आ सकती है। कुछ मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि समूह में ताली बजाने से सामूहिक ऊर्जा का अनुभव होता है, जो व्यक्ति को मानसिक रूप से हल्का और उत्साहित महसूस कराता है। यही कारण है कि योग और ध्यान के कुछ अभ्यासों में ताली बजाने को शामिल किया गया है।
आयुर्वेद में इसे प्राण ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि सुबह खाली पेट कुछ मिनट ताली बजाने से शरीर की सुस्ती दूर होती है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। इसके साथ ही पाचन तंत्र से जुड़े बिंदुओं पर प्रभाव पड़ने के कारण पाचन क्रिया में सुधार होने की भी बात कही जाती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि पाचन संबंधी समस्याओं के लिए संतुलित आहार और चिकित्सकीय सलाह अधिक महत्वपूर्ण है। बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए ताली बजाना एक सुरक्षित गतिविधि मानी जाती है। बच्चों में इससे एकाग्रता और तालमेल विकसित करने में मदद मिल सकती है, जबकि बुजुर्गों में यह हाथों की सक्रियता बनाए रखने का सरल तरीका बन सकता है। कुछ फिटनेस प्रशिक्षक इसे हल्के वार्म-अप अभ्यास के रूप में भी सुझाते हैं, ताकि शरीर धीरे-धीरे सक्रिय हो सके।
हालांकि ताली बजाने से जुड़े कई फायदे बताए जाते हैं, लेकिन चिकित्सक यह स्पष्ट करते हैं कि इसे किसी गंभीर बीमारी का इलाज नहीं समझना चाहिए। यह एक पूरक गतिविधि है, जो स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बन सकती है। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद के साथ यदि इसे अपनाया जाए, तो इसके सकारात्मक परिणाम महसूस किए जा सकते हैं।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां लोग स्वास्थ्य के लिए महंगे उपकरण और जटिल उपाय तलाशते हैं, वहीं ताली बजाना एक ऐसा सरल तरीका है, जिसे कोई भी, कहीं भी और बिना खर्च के कर सकता है। यह न तो समय मांगता है और न ही विशेष प्रशिक्षण। जरूरत है तो बस नियमितता और सही दृष्टिकोण की।
कुल मिलाकर ताली बजाना केवल तालियों की गूंज नहीं, बल्कि शरीर और मन को सक्रिय करने का एक सहज माध्यम भी हो सकता है। इसे चमत्कारी इलाज मानने के बजाय, यदि रोजमर्रा की छोटी-सी अच्छी आदत के रूप में अपनाया जाए, तो यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।