केंद्रीय विद्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस का कार्यक्रम: डॉ. पांडेय ने विद्यार्थियों को विवेकानन्द के चरित्र, साधना और वैश्विक दृष्टि से अवगत कराया।

Thu 15-Jan-2026,01:03 AM IST +05:30

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केंद्रीय विद्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस का कार्यक्रम: डॉ. पांडेय ने विद्यार्थियों को विवेकानन्द के चरित्र, साधना और वैश्विक दृष्टि से अवगत कराया। डॉ. पांडेय ने विद्यार्थियों को विवेकानन्द के चरित्र, साधना और वैश्विक दृष्टि से अवगत कराया।
  • केंद्रीय विद्यालय वर्धा में राष्ट्रीय युवा दिवस पर स्वामी विवेकानन्द के जीवन, विचार और राष्ट्रनिर्माण के संदेश पर प्रेरक आयोजन हुआ।

  • डॉ. कृष्ण चन्द पांडेय ने विद्यार्थियों को विवेकानन्द के चरित्र, साधना और वैश्विक दृष्टि से अवगत कराया।

  • कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में आत्मविश्वास, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करना रहा।

Maharashtra / Wardha :

वर्धा/ केंद्रीय विद्यालय, वर्धा में राष्ट्रीय युवा दिवस एवं स्वामी विवेकानन्द की जन्म जयन्ती को अत्यंत गरिमा, अनुशासन और बौद्धिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के भदन्त आनन्द कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ. कृष्ण चन्द पांडेय मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, चरित्र निर्माण और युवाशक्ति के महत्व को उजागर करना रहा।

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय, वर्धा का सभागार विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों से भरा रहा। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. कृष्ण चन्द पांडेय द्वारा विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद के साथ हुई, जिसमें उन्होंने प्रश्नोत्तर के माध्यम से बच्चों की जिज्ञासा, आत्मविश्वास और उत्साह को प्रोत्साहित किया।

अपने प्रेरक वक्तव्य में उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के जीवन और कृतित्व को सरल एवं रोचक शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानन्द बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे और उनमें अनेक ऐसे गुण विद्यमान थे, जो सामान्यतः दुर्लभ होते हैं। कुछ असाधारण क्षमताएँ उन्होंने कठोर अभ्यास और अनुशासन के माध्यम से विकसित कीं। अपने गुरु श्रीरामकृष्ण परमहंस के मार्गदर्शन में उन्होंने आत्मिक शक्ति, चरित्र और व्यक्तित्व को सुदृढ़ बनाया, जिससे वे युगप्रवर्तक कार्य करने में सक्षम हुए।

डॉ. पांडेय ने बताया कि स्वामी विवेकानन्द ने भारतवर्ष का व्यापक भ्रमण कर देश की तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति को निकट से देखा। इस भारत-दर्शन से उन्होंने एक ओर भारत के गौरवशाली अतीत को जाना, वहीं दूसरी ओर तत्कालीन दयनीय परिस्थितियों का भी गहन अनुभव किया। उन्होंने यह पाया कि अधिकांश भारतीय अपने महान इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से विमुख हो चुके हैं।

वेद-वेदान्त के तत्त्व को आत्मानुभूति से जानने वाले स्वामी विवेकानन्द ने मानवमात्र के कल्याण के लिए वेदान्त के सार्वभौमिक संदेश को विश्वपटल पर प्रस्तुत करने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य से उन्होंने अनेक कठिनाइयों के बावजूद अमेरिका की यात्रा की, जहाँ उन्होंने भारत के उज्ज्वल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर प्रबल जनमत तैयार किया। इसके पश्चात् उन्होंने इंग्लैंड और अन्य यूरोपीय देशों में भी भारत का पक्ष रखा।

भारत लौटने के बाद स्वामी विवेकानन्द ने शिक्षा, सामाजिक सेवा, निर्धन सहायता और महिला उत्थान के लिए ठोस योजनाएँ बनाईं। वक्ता ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।