गरियाबंद में नक्सली आत्मसमर्पण, बलदेव-अंजू सहित सुरक्षा व पुनर्वास मिलेगा
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गरियाबंद में आठ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिसमें दो कुख्यात DVCM नक्सली बलदेव और अंजू भी शामिल हैं।
इस कदम से नक्सल संगठन कमजोर होगा और प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
Gariyaband/ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली माओवादी विचारधारा की कठोरता और संगठन की भेदभावपूर्ण नीति से लंबे समय से असंतुष्ट थे। अधिकारियों ने बताया कि लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों और प्रशासन की प्रभावी नक्सल विरोधी रणनीति से प्रभावित होकर उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।
छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सुरक्षा, आर्थिक सहायता और मुख्यधारा में लौटने के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
बलदेव और अंजू जैसे कुख्यात नक्सली संगठन की रीढ़ माने जाते थे। उनके आत्मसमर्पण से नक्सल संगठन की ताकत में कमी आएगी और क्षेत्रीय सुरक्षा बलों को अपराध नियंत्रण में अधिक प्रभावी तरीके से कार्य करने का अवसर मिलेगा।
सुरक्षा बलों ने इस आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता बताया है। अधिकारियों का मानना है कि पुनर्वास नीति और मुख्यधारा में लौटने के अवसर से अन्य नक्सलियों को भी हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
इस मौके पर प्रशासन ने कहा कि यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का मुख्यधारा में पुनर्वास स्थानीय समाज और शासन के लिए भी संदेश है कि हिंसा का विकल्प छोड़कर जीवन को नया मार्ग दिया जा सकता है।