पश्चिम एशिया संकट पर सरकार अलर्ट: राजनाथ सिंह की हाई लेवल बैठक, PM मोदी ने देशवासियों से की बड़ी अपील
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West Asia Crisis
पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र सरकार की हाई लेवल बैठक.
पीएम मोदी ने ईंधन बचाने और स्वदेशी अपनाने की अपील की.
आर्थिक आत्मनिर्भरता और प्राकृतिक खेती पर सरकार का जोर.
Delhi / पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर मंडरा रहे खतरे के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। इसी कड़ी में सोमवार को रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कर्तव्य भवन-2 में मंत्रियों के अनौपचारिक सशक्त समूह (IGOM) की हाई लेवल बैठक की अध्यक्षता की। इस अहम बैठक का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट की लगातार निगरानी करना और भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति तथा रणनीतिक सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को कम करना था।
बैठक में विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र, होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक ईंधन आपूर्ति से जुड़े जोखिमों पर चर्चा हुई। सरकार को आशंका है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, व्यापारिक गतिविधियों और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। इससे पहले भी 28 मार्च और 2 अप्रैल 2026 को ऊर्जा आपूर्ति और बुनियादी ढांचे की मजबूती को लेकर उच्च स्तरीय चर्चाएं की गई थीं।
इसी बीच Narendra Modi ने हैदराबाद में देशवासियों को संबोधित करते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार नागरिकता को लेकर बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर जाकर लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में जिम्मेदारी निभाना भी राष्ट्र सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने नागरिकों से ईंधन बचाने और संसाधनों के समझदारी से उपयोग की अपील की।
प्रधानमंत्री ने लोगों से मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कार-पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक इस्तेमाल करने का आग्रह किया, ताकि पेट्रोल-डीजल की खपत कम हो सके। उन्होंने कोविड काल की तरह वर्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल माध्यमों को अपनाने पर भी जोर दिया, जिससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ आर्थिक खर्चों में भी कमी लाई जा सके।
पीएम मोदी ने देशवासियों से “रुपये का संरक्षक” बनने की अपील करते हुए गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं, विदेशों में छुट्टियां मनाने और डेस्टिनेशन वेडिंग्स से बचने को कहा। उन्होंने लोगों से घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने और भारत में ही उत्सव मनाने की सलाह दी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने, विदेशी सामानों की बजाय ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को प्राथमिकता देने और खाद्य तेल के सीमित उपयोग का भी आग्रह किया।
किसानों के लिए भी प्रधानमंत्री ने बड़ा संदेश दिया। उन्होंने रासायनिक खादों और केमिकल आधारित खेती में 50 प्रतिशत तक कटौती कर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। सरकार का मानना है कि इससे न केवल किसानों की लागत घटेगी बल्कि देश आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।
सरकार और प्रधानमंत्री के इन संदेशों से साफ है कि भारत आने वाले वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकटों से निपटने के लिए अभी से तैयारी में जुट गया है। अब देखना होगा कि जनता और उद्योग जगत इस अपील को किस हद तक जन आंदोलन का रूप देते हैं।