भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अनुसार, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ छह राज्यों में उपचुनावों की घोषणा के बाद से यह बड़ी कार्रवाई की गई है। राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा करीब 319 करोड़ रुपये की जब्ती दर्ज की गई है। इसके बाद तमिलनाडु में 170 करोड़, असम में 97 करोड़, केरल में 58 करोड़ और पुडुचेरी में 7 करोड़ रुपये की अवैध सामग्री पकड़ी गई है।
जब्त की गई सामग्री में 53.2 करोड़ रुपये नकद, लगभग 29.63 लाख लीटर शराब (जिसकी कीमत करीब 79.3 करोड़ रुपये है), 230 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ, 58 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं और 231 करोड़ रुपये से अधिक के मुफ्त उपहार शामिल हैं। ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि चुनावों के दौरान अवैध गतिविधियों को रोकना कितना बड़ा और जरूरी काम है।
चुनाव आयोग ने केवल जब्ती तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि निगरानी और नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां भी की हैं। जमीनी स्तर पर 5,173 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं, जिनका काम चुनाव से जुड़ी शिकायतों का 100 मिनट के भीतर निपटारा करना है। इसके अलावा 5,200 से ज्यादा स्टैटिक सर्विलांस टीमें (SST) भी सक्रिय हैं, जो विभिन्न जगहों पर अचानक चेकिंग कर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।
इसके साथ ही आयोग ने पांचों चुनावी राज्यों के अलावा उनके 12 सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों—मुख्य सचिव, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), पुलिस महानिदेशक (DGP) और जिला प्रशासन—के साथ कई समीक्षा बैठकें की हैं। इन बैठकों में साफ निर्देश दिए गए हैं कि चुनाव प्रक्रिया को हिंसा-मुक्त, भयमुक्त और प्रलोभन-मुक्त बनाया जाए।
आयोग ने 26 फरवरी 2026 को इलेक्ट्रॉनिक जब्ती प्रबंधन प्रणाली (ESMS) भी लागू की है, जिसके जरिए जब्ती की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और डेटा का सही रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है।
साथ ही, चुनाव आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जांच के दौरान आम नागरिकों को किसी तरह की अनावश्यक परेशानी न हो। इसके लिए जिला स्तर पर शिकायत निवारण समितियां बनाई गई हैं, ताकि लोगों की शिकायतों का तुरंत समाधान किया जा सके। नागरिकों और राजनीतिक दलों को भी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके अलावा, ECI ने ‘C-Vigil’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आम लोगों को भी सशक्त किया है, जहां वे आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत सीधे दर्ज कर सकते हैं। यह कदम चुनावों में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, चुनाव आयोग इस बार हर स्तर पर सक्रिय नजर आ रहा है। उसकी कोशिश है कि चुनाव न केवल शांतिपूर्ण हों, बल्कि पूरी तरह निष्पक्ष और विश्वसनीय भी हों, ताकि लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत हो सकें।