हालांकि, इस दावे को अमेरिका ने खारिज किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा और पायलट को सुरक्षित निकाल लिया गया। दोनों देशों के अलग-अलग दावों के बीच सच्चाई क्या है, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन स्थिति की गंभीरता साफ नजर आ रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुछ अमेरिकी विमान ईरान में फंस गए थे। बाद में अमेरिका ने अतिरिक्त विमान भेजे और फंसे हुए विमानों को खुद ही नष्ट कर दिया, ताकि उनकी तकनीक ईरान के हाथ न लग सके। यह कदम इस बात को दिखाता है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर अपनी सैन्य तकनीक की सुरक्षा चाहता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बढ़ गया है। ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे के भीतर इसे खोलने या समझौता करने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। लेकिन ईरान ने इस अल्टीमेटम को सिरे से खारिज कर दिया और इसे अमेरिका की घबराहट करार दिया।
ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत के पेट्रोकेमिकल प्लांट्स पर जवाबी हमले किए हैं। IRGC के अनुसार, यह कार्रवाई तेहरान के पास कराज शहर में हुए हमलों के जवाब में की गई। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर आम नागरिकों या सिविल ठिकानों को निशाना बनाया गया, तो अगली बार उसका जवाब और भी ज्यादा सख्त होगा।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी बड़ा दावा किया है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में उन्होंने ईरान की 9 बैलिस्टिक मिसाइल, एक क्रूज मिसाइल और करीब 50 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। युद्ध की शुरुआत से अब तक UAE सैकड़ों मिसाइलों और हजारों ड्रोन को रोक चुका है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते खतरे को दर्शाता है।
हालांकि, एक घटना में ईरानी ड्रोन का मलबा अबू धाबी के एक पेट्रोकेमिकल प्लांट पर गिरा, जिससे वहां आग लग गई। स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
कुल मिलाकर, यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि मध्य पूर्व में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। एक तरफ अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय देश भी इस संघर्ष की चपेट में आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या कूटनीति से हालात संभलते हैं या तनाव और बढ़ता है।