प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार राज्य की न्याय व्यवस्था को कमजोर करने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार से जनता की सुरक्षा की उम्मीद करना मुश्किल है। मोदी ने यह भी कहा कि अब टीएमसी के “पापों का घड़ा भर चुका है” और पूरे बंगाल में बदलाव की लहर साफ नजर आ रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे डर और दबाव से बाहर निकलकर मतदान करें।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने टीएमसी पर “कट मनी” और डर की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी “भरोसे” की राजनीति करती है और जनता को एक सुरक्षित और पारदर्शी शासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मतदाताओं को भरोसा दिलाया कि अगर चुनाव के दौरान उन्हें डराने या धमकाने की कोशिश की जाती है, तो वे कानून पर भरोसा रखें। चुनाव के बाद हर अन्याय का हिसाब लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने बंगाल की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि टीएमसी शासन में राज्य की प्रगति रुक गई है और लोगों की औसत आय में गिरावट आई है। उन्होंने एसएससी घोटाले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं ने भ्रष्टाचार के जरिए युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
मोदी ने अपने भाषण में केंद्र सरकार की योजनाओं और विज़न का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि संसद का बजट सत्र बढ़ाया गया है ताकि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण कानून को लागू किया जा सके और लोकसभा सीटों का पुनर्गठन हो सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने कई मामलों में जांच एजेंसियों के काम में बाधा डाली, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
संदेशखाली की घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने वादा किया कि यदि बंगाल में बीजेपी की सरकार बनती है, तो महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उन्होंने रोजगार सृजन, बेहतर प्रशासन और “आत्मनिर्भर बांग्ला” के निर्माण का विज़न भी साझा किया।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन पूरी तरह चुनावी माहौल से जुड़ा रहा, जिसमें उन्होंने टीएमसी सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जनता से बदलाव के लिए समर्थन मांगा।