पटना में बड़ा बदलाव: दीघा घाट पर बनेगा बिहार का पहला LPG शवदाह गृह, पर्यावरण को राहत!
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Digha Ghat Patna
दीघा घाट पर LPG शवदाह गृह का निर्माण.
प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण की पहल.
पारंपरिक और आधुनिक दोनों विकल्प उपलब्ध.
Patna / पटना में अब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है, जहां परंपरा और आधुनिकता का संतुलन देखने को मिलेगा। राजधानी के दीघा घाट पर बिहार का पहला LPG आधारित शवदाह गृह बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। यह पहल न सिर्फ शहर के लिए, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस प्रोजेक्ट के तहत पटना नगर निगम और ईशा फाउंडेशन के बीच एक अहम समझौता हुआ है। खास बात यह है कि नगर निगम ने 2.11 एकड़ जमीन 33 साल के लिए मात्र 1 रुपये में ‘ईशा आउटरीच’ को लीज पर दी है। इससे यह साफ होता है कि प्रशासन इस परियोजना को लेकर कितना गंभीर है और इसे जल्दी से जल्दी लागू करना चाहता है।
फिलहाल दीघा घाट पर पारंपरिक तरीके से लकड़ी का उपयोग कर अंतिम संस्कार किया जाता है। इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में लकड़ी की खपत होती है, जिससे पेड़ों की कटाई बढ़ती है। इसके अलावा, दाह संस्कार के दौरान निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ाता है और गंगा नदी के पानी पर भी इसका असर पड़ता है। ऐसे में LPG आधारित शवदाह गृह इन समस्याओं का एक प्रभावी समाधान बनकर सामने आएगा।
नया गैस आधारित सिस्टम पूरी तरह से आधुनिक और साफ-सुथरा होगा। इससे न सिर्फ प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध हो सकेगी। यह उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी होगा, जो पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं और कम समय में सम्मानजनक तरीके से अंतिम विदाई देना चाहते हैं।
हालांकि, इस बदलाव के बीच परंपराओं का भी पूरा ध्यान रखा गया है। जो लोग आज भी लकड़ी से अंतिम संस्कार करना चाहते हैं, उनके लिए अलग से व्यवस्था जारी रहेगी। यानी यह परियोजना किसी परंपरा को खत्म करने के बजाय लोगों को एक नया और बेहतर विकल्प देने का प्रयास है।
कुल मिलाकर, दीघा घाट पर बनने वाला यह LPG शवदाह गृह पटना को एक स्वच्छ और आधुनिक दिशा में ले जाने वाला कदम है। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि आने वाले समय में यह मॉडल अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।