मप्र कांग्रेस में सियासी हलचल: राज्यसभा दावेदारी, UCC और वंदेमातरम पर घमासान तेज
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सज्जन सिंह वर्मा की राज्यसभा दावेदारी के बीच उनकी बयानबाजी पर सवाल, कांग्रेस में आंतरिक राजनीति और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वंदेमातरम विवाद ने कांग्रेस को घेरा, भाजपा के हमलों के बीच पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
Bhopal/ मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर और बाहर कई मुद्दों को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव की तैयारियों, नेताओं की दावेदारी, यूसीसी पर रणनीति और वंदेमातरम विवाद जैसे मुद्दों ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। पार्टी के भीतर जहां नेतृत्व और बयानबाजी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Sajjan Singh Verma राज्यसभा सीट के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। उनका लंबा राजनीतिक अनुभव पार्षद से लेकर सांसद तक उन्हें मजबूत उम्मीदवार बनाता है। हालांकि, उनकी बेबाक और कभी-कभी विवादित भाषा उनके लिए चुनौती बनती नजर आ रही है। हाल ही में उन्होंने अपनी दावेदारी पेश करते हुए कहा कि संसद में अनुभवी व्यक्ति की जरूरत है, जो भाजपा को जवाब दे सके। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है।
इसी बीच कांग्रेस संगठन ने कुछ सख्त फैसले भी लिए हैं। युवा कांग्रेस के 38 पदाधिकारियों को परफॉर्मेंस रिव्यू में फेल होने के कारण पद से हटा दिया गया। यह कदम संगठन में जवाबदेही और अनुशासन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Hemant Katare ने फ्री योजनाओं के खिलाफ बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी योजनाएं तुरंत बंद होनी चाहिए, भले ही इससे राजनीतिक नुकसान हो।
दूसरी ओर, केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर आदिवासी और किसान आंदोलनरत हैं। पन्ना और छतरपुर जिलों में विस्थापन और मुआवजे को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। आंदोलनकारी ‘चिता आंदोलन’ जैसे विरोध के नए तरीके अपना रहे हैं। प्रशासन और सरकार के स्तर पर अब तक ठोस समाधान नहीं निकल पाने से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
यूसीसी (समान नागरिक संहिता) को लेकर भी कांग्रेस रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा समिति गठन की घोषणा के बाद कांग्रेस इसे आदिवासी मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में है। नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने संकेत दिए हैं कि यदि यूसीसी से आदिवासी परंपराओं पर असर पड़ा, तो इसका विरोध किया जाएगा।
वहीं वंदेमातरम विवाद ने भी कांग्रेस को घेर लिया है। इंदौर की दो महिला पार्षदों द्वारा इसे गाने से इंकार करने पर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री Mohan Yadav और अन्य नेताओं ने इसे देशभक्ति से जोड़ते हुए सवाल उठाए। कांग्रेस नेतृत्व ने कार्रवाई की बात तो कही, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश कांग्रेस इस समय कई मोर्चों पर घिरी हुई है जहां आंतरिक राजनीति, वैचारिक मतभेद और बाहरी दबाव सभी एक साथ चुनौती बनकर सामने आ रहे हैं।