थारू समाज को बड़ी राहत: सरकार मुकदमे वापस लेगी, हजारों परिवारों को मिला जमीन का अधिकार
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Lakhimpur Kheri Development Projects
थारू समाज के विरुद्ध पुराने मुकदमे होंगे वापस, मिलेगा न्याय.
नदी कटान प्रभावित व थारू जनजाति के 6,706+ परिवारों को भौमिक पट्टे.
817 करोड़ से 314 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास.
Lakhimpur / लखीमपुर खीरी में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने थारू समाज और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हजारों परिवारों को बड़ी सौगात देते हुए ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकारों के दौरान थारू समाज के लोगों पर जो भी मुकदमे दर्ज किए गए थे, उन्हें अब वापस लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब किसी भी निर्दोष व्यक्ति को उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान नदियों के कटान से प्रभावित 2350 परिवारों और थारू जनजाति के 4356 परिवारों को भौमिक पट्टों का वितरण भी किया, जिससे उन्हें जमीन का वैधानिक अधिकार मिला। कार्यक्रम चंदन चौकी क्षेत्र में आयोजित हुआ, जहां मुख्यमंत्री ने 817 करोड़ रुपये की लागत से पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला गोकर्णनाथ विधानसभा क्षेत्रों में 314 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ विकास कार्यों का उद्घाटन नहीं, बल्कि दशकों से अधिकार से वंचित लोगों को सम्मान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शासन का उद्देश्य तभी सफल होता है जब जनता को उसका अधिकार और सम्मान दोनों मिले, और यही डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता है। इस मौके पर उन्होंने माफियाओं और अपराधियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई कानून व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश करेगा तो उसे कठोर परिणाम भुगतने होंगे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में थारू समाज के संघर्ष और उनके ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समुदाय लंबे समय तक अपनी पहचान और अधिकारों के लिए जूझता रहा है। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद भी कई पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन उन्हें जमीन का स्वामित्व नहीं मिल पाया। वर्ष 1976 में थारू समाज को जमीन देने की बात जरूर हुई, लेकिन इसे जमीन पर लागू नहीं किया गया। इसी तरह 1955 में पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उनके परिवारों को भी बसाया गया, लेकिन उन्हें कानूनी अधिकार नहीं मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार उन सभी ऐतिहासिक भूलों को सुधारने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि 4356 थारू परिवारों को 5338 हेक्टेयर भूमि और 2350 अन्य परिवारों को 4251 हेक्टेयर भूमि का स्वामित्व प्रदान किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होता है, तभी अधिकार वास्तविक रूप में धरातल पर उतरते हैं। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनमें संवेदनशीलता की कमी थी और वे केवल परिवारवाद और सीमित क्षेत्रों तक विकास को सीमित रखती थीं, जबकि वर्तमान सरकार पूरे राज्य के संतुलित विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अब हर जिले में योजनाएं पहुंच रही हैं और हर वर्ग को समान अवसर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने थारू समाज को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि उद्यमी बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने बताया कि खीरी जिले में थारू हस्तशिल्प कंपनी की स्थापना इसी सोच का परिणाम है, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों की सराहना करते हुए बताया कि क्षेत्र में 300 से अधिक समूह सक्रिय हैं, जिन्हें सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने विधायक रोमी साहनी को चंदन चौकी क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर उद्योग और व्यवसाय बढ़ाने के निर्देश भी दिए, ताकि रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें। इसके अलावा उन्होंने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए त्वरित सर्वे और मुआवजा वितरण का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल बीमा योजना और आपदा राहत कोष के माध्यम से किसानों को हर संभव सहायता दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में विकास की नई धारा बह रही है, जिसमें गोला गोकर्णनाथ कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज, प्लास्टिक पार्क और एयर कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की योजनाओं और प्रयासों से लखीमपुर खीरी समेत पूरे उत्तर प्रदेश में आत्मनिर्भरता, सम्मान और समृद्धि का नया अध्याय लिखा जाएगा।