ईरान-अमेरिका वार्ता फेल, 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा: मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Sun 12-Apr-2026,04:23 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

ईरान-अमेरिका वार्ता फेल, 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा: मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव Iran US Talks
  • 21 घंटे की वार्ता बेनतीजा खत्म. 

  • परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट बना विवाद. 

  • मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका. 

Tehran Province / Tehran :

Tehran / पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शांति को लेकर चली लंबी और अहम बातचीत आखिरकार बेनतीजा खत्म हो गई। यह वार्ता 21 घंटे से अधिक समय तक चली, लेकिन दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। इस नाकामी ने मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ अमेरिका लौट गए। रवाना होने से पहले उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि अमेरिका बिना किसी समझौते के वापस जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह स्थिति अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। वेंस के अनुसार, अमेरिका ने बातचीत के दौरान काफी लचीलापन दिखाया और अपना “आखिरी और सबसे बेहतर प्रस्ताव” भी दिया, लेकिन ईरान ने उसे स्वीकार नहीं किया।

वेंस ने स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित समझौते की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि ईरान भरोसा दिलाए कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही ऐसी कोई तैयारी करेगा जिससे वह जल्द हथियार बनाने की स्थिति में पहुंच सके। लेकिन लंबी बातचीत के बावजूद ईरान इस मुद्दे पर स्पष्ट आश्वासन देने से पीछे हटता रहा।

हालांकि वेंस ने यह भी कहा कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका की ओर से एक अंतिम प्रस्ताव दिया जा चुका है और अब यह ईरान पर निर्भर है कि वह इसे स्वीकार करता है या नहीं। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी शर्तों को “जरूरत से ज्यादा सख्त” बताते हुए उन्हें मानने से इनकार कर दिया। ईरान का कहना है कि इन शर्तों के साथ किसी संतुलित समझौते तक पहुंचना संभव नहीं था।

इस बीच क्षेत्रीय हालात और भी गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिकी सेना के सेंटकॉम (CENTCOM) ने जानकारी दी है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी युद्धपोत सक्रिय किए जा रहे हैं। आरोप है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी साफ कर दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका दावा है कि हालिया हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा नुकसान पहुंचा है और ये कदम इसलिए उठाए गए क्योंकि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब था।

इसी बीच, ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ पाकिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने एक भावुक संदेश देते हुए उन बच्चों की तस्वीरें दिखाईं जो हालिया मिसाइल हमलों में मारे गए थे। इन हमलों के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराया गया है। लेबनान से भी हमलों की खबरें सामने आई हैं, जहां तुफाहता इलाके में हुए हमलों में 9 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान वार्ता का असफल होना सिर्फ एक कूटनीतिक झटका नहीं है, बल्कि यह पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आगे कोई नया समझौता संभव होगा या फिर तनाव और गहराएगा।