राजनाथ सिंह का युवाओं से आह्वान

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राजनाथ सिंह का युवाओं से आह्वान Rajnath-Singh-NCC-Youth-Strength-Republic-Day-Camp
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एनसीसी कैडेटों को राष्ट्र की दूसरी रक्षा पंक्ति बताते हुए युवाओं से हर चुनौती के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने को कहा।

  • 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की निर्णायक भूमिका बताते हुए रक्षा मंत्री ने सैन्य सोच और वैकल्पिक योजनाओं पर जोर दिया।

Delhi / Delhi :

Delhi/ दिल्ली कैंट में आयोजित एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने युवाओं और एनसीसी कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा कि जब दुनिया अस्थिरता और अनिश्चितता से गुजर रही है, तब भारत के युवाओं को हर स्तर पर मजबूत रहना होगा। उन्होंने कहा कि शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक संतुलन और भावनात्मक दृढ़ता ही किसी भी संकट से निपटने की असली ताकत है।

रक्षा मंत्री ने “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान एनसीसी कैडेटों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देशभर में आयोजित मॉक ड्रिल के माध्यम से कैडेटों ने जन-जागरूकता बढ़ाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को सटीक कार्रवाई में नष्ट किया, जो पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले का करारा जवाब था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सफलता इसलिए संभव हुई क्योंकि हमारे सैनिक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त हैं। इसी शक्ति को युवाओं को भी अपनाना चाहिए। श्री सिंह ने युवाओं की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से करते हुए कहा कि आज का युवा किसी भी “चक्रव्यूह” में प्रवेश कर उससे बाहर निकलने की क्षमता रखता है।

रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक “विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने में युवाओं की भूमिका को केंद्रीय बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं से अपेक्षाएं बढ़ गई हैं और वे राष्ट्र की अमूल्य पूंजी हैं, जिन पर देश का भविष्य निर्भर करता है।

एनसीसी को युवाओं के सर्वांगीण विकास का उत्कृष्ट माध्यम बताते हुए श्री सिंह ने कहा कि परेड, ड्रिल और शिविर कैडेटों को उनके आराम क्षेत्र से बाहर निकालते हैं। इससे उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन कौशल विकसित होते हैं, जो आपदा प्रबंधन से लेकर नेतृत्व तक हर क्षेत्र में सहायक हैं।

उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में एनसीसी युवाओं को “ध्यान भटकने” की समस्या से बाहर निकालकर धैर्य, निरंतरता और एकाग्रता सिखाती है। यही गुण आगे चलकर उन्हें सैनिक, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासक या राजनेता के रूप में सफल बनाते हैं।

रक्षा मंत्री ने “प्लान-बी और प्लान-सी” की सोच पर जोर देते हुए कहा कि जीवन में केवल एक विकल्प पर निर्भर रहना निराशा को जन्म देता है। सैन्य सोच अपनाकर वैकल्पिक योजनाएं तैयार रखना सफलता की कुंजी है।

उन्होंने एनसीसी की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडे और कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे वीर एनसीसी कैडेट रहे हैं। 1965 और 1971 के युद्धों में भी एनसीसी ने दूसरी रक्षा पंक्ति के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

कार्यक्रम में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया, जहां उत्कृष्ट कैडेटों को रक्षा मंत्री पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। साथ ही शानदार गार्ड ऑफ ऑनर, बैंड प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ‘ध्वज क्षेत्र’ का निरीक्षण भी किया गया।