कुरूद से ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ शुरू करेगी कांग्रेस
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कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ की शुरुआत धमतरी के कुरूद से करने की घोषणा की, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे संबोधन।
पार्टी ने मनरेगा बजट कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी और तकनीकी अड़चनों को केंद्र सरकार के खिलाफ मुख्य मुद्दा बनाया।
Kurud/ छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने जा रही है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ शुरू करने की घोषणा की है। इस राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन की शुरुआत धमतरी जिले के कुरूद से होगी। प्रस्तावित जनसभा में वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi और कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge शामिल होंगे। पार्टी का दावा है कि यह सभा ग्रामीण रोजगार के मुद्दे पर निर्णायक संदेश देगी।
कांग्रेस ने अभियान की तैयारियों को लेकर संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और महामंत्री मलकीत सिंह गेंदू ने कुरूद पहुंचकर संभावित आयोजन स्थलों का निरीक्षण किया। खेल मेला मैदान, अटल बिहारी बाजपेयी स्टेडियम और नई मंडी क्षेत्र में व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। पार्टी का लक्ष्य है कि मार्च के दूसरे सप्ताह में प्रस्तावित यह कार्यक्रम ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कुरूद कृषि प्रधान और ग्रामीण आबादी वाला क्षेत्र है, जहां मनरेगा लाखों परिवारों के लिए आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में यहां से आंदोलन की शुरुआत कर पार्टी सीधे मजदूरों और किसानों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के बजट में कटौती की है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं।
इसके अलावा मजदूरी भुगतान में देरी, तकनीकी अड़चनें और काम स्वीकृति प्रक्रिया में जटिलताओं को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि ग्रामीण रोजगार का अधिकार कमजोर किया जा रहा है और यही कारण है कि अब व्यापक जनआंदोलन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
संगठन स्तर पर भी व्यापक तैयारी की जा रही है। जिला अध्यक्ष तारणी चंद्राकर, नीलम चंद्राकर और स्थानीय ब्लॉक अध्यक्ष गांव-गांव संपर्क अभियान चला रहे हैं। पीले चावल बांटकर लोगों को आमंत्रित करने की परंपरागत शैली अपनाई जा रही है, ताकि अधिकतम ग्रामीण सहभागिता सुनिश्चित हो सके। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक जनसभा नहीं, बल्कि केंद्र की नीतियों के खिलाफ राजनीतिक संदेश देने का मंच होगा। पार्टी को उम्मीद है कि कुरूद से उठी यह आवाज राष्ट्रीय बहस को नई दिशा देगी और ग्रामीण रोजगार के मुद्दे को केंद्र में लाएगी।