भोपाल-इंदौर में ACP लीगल नियुक्ति से पुलिसिंग और कोर्ट कार्य में सुधार
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भोपाल और इंदौर में चार साल बाद एसीपी (लीगल) पदों पर नियुक्ति की तैयारी, पुलिसिंग और कोर्ट कार्य को अलग करने की पहल।
जोन आधारित जिम्मेदारी तय, कोर्ट मामलों का निपटारा तेज होगा और अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस की कार्यकुशलता में सुधार आएगा।
Bhopal/ मध्यप्रदेश के भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में कार्यप्रणाली को अधिक पेशेवर और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव की तैयारी की जा रही है। लंबे समय से खाली पड़े एसीपी (लीगल) के पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद से लगभग चार वर्षों से ये पद रिक्त हैं।
प्रारंभिक दौर में एक अधिकारी की नियुक्ति की गई थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद से पद खाली पड़े हैं। अब पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजकर इन पदों को जल्द भरने की मांग की गई है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद एसीपी (लीगल) कोर्ट से जुड़े सभी मामलों की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं, सब-डिवीजन एसीपी को फील्ड ड्यूटी पर पूरा ध्यान देने का अवसर मिलेगा। इससे पुलिसिंग की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में सुधार आने की संभावना है।
भोपाल कमिश्नरेट को चार जोन में विभाजित किया गया है। प्रस्तावित योजना के तहत एक एसीपी (लीगल) जोन-1 और जोन-2 की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि दूसरा अधिकारी जोन-3 और जोन-4 की देखरेख करेगा। इससे कोर्ट मामलों की सुनवाई व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से हो सकेगी।
अब तक सब-डिवीजन एसीपी को कोर्ट पेशियों और कानूनी प्रक्रियाओं में भी समय देना पड़ता था, जिससे फील्ड में उनकी सक्रियता प्रभावित होती थी। नई व्यवस्था के बाद वे कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और थानों की निगरानी पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत एसीपी कोर्ट में शांति भंग की आशंका, संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी, आदतन अपराधियों पर कार्रवाई और जमानत शर्तों के उल्लंघन जैसे मामलों की सुनवाई करते हैं। इस पहल से पुलिस व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। कोर्ट कार्य में तेजी आएगी और फील्ड पुलिसिंग अधिक मजबूत होगी, जिससे अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।