भारत को ईरानी तेल का मौका, महंगी कीमत और सख्त शर्तों ने बढ़ाई चिंता

Tue 24-Mar-2026,02:07 PM IST +05:30

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भारत को ईरानी तेल का मौका, महंगी कीमत और सख्त शर्तों ने बढ़ाई चिंता India-Iran-Oil-Deal-Price-Payment-Challenges
  • अमेरिका की अस्थायी छूट के बाद भारत को ईरानी तेल खरीदने का मौका मिला, लेकिन महंगी कीमत और सख्त भुगतान शर्तें बड़ी चुनौती बन रही हैं।

  • SWIFT से बाहर ईरान के कारण भुगतान प्रक्रिया जटिल, होर्मुज संकट से सप्लाई प्रभावित, भारत को ऊर्जा रणनीति पर जल्द निर्णय लेना जरूरी।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ा है। इसी बीच भारत के सामने ईरानी तेल आयात का एक नया अवसर उभरा है, लेकिन इसके साथ जुड़ी शर्तें इसे जटिल बना रही हैं।

करीब 2019 के बाद पहली बार भारत को ईरान से कच्चा तेल खरीदने का मौका मिला है। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थायी ढील के चलते यह विकल्प खुला है। हालांकि यह छूट केवल सीमित अवधि के लिए दी गई है, जिससे भारत को जल्द फैसला लेना होगा।

इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, ईरान द्वारा भारत को जो कच्चा तेल ऑफर किया जा रहा है, वह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड से 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल महंगा है। इससे भारतीय रिफाइनरियों के लिए यह सौदा आर्थिक रूप से कम आकर्षक हो सकता है, खासकर तब जब वैश्विक बाजार पहले से अस्थिर है।

पेमेंट शर्तें भी भारत के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। ईरानी कंपनियां इस डील के लिए डॉलर में भुगतान की मांग कर रही हैं और अधिकतर लेनदेन इसी मुद्रा में करने की शर्त रखी गई है। कुछ मामलों में रुपये में भुगतान की संभावना जरूर है, लेकिन वह सीमित है। इसके अलावा, तेल की खेप पहुंचने के सात दिनों के भीतर पूरा भुगतान करना अनिवार्य बताया गया है।

सबसे बड़ी बाधा अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क SWIFT से ईरान का बाहर होना है। इससे भुगतान प्रक्रिया जटिल और जोखिमपूर्ण हो जाती है। भारतीय रिफाइनरियां किसी भी समझौते से पहले वित्तीय सुरक्षा और लेनदेन के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।

इसी दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और यहां किसी भी व्यवधान का असर सीधे भारत जैसे बड़े आयातकों पर पड़ता है।

एलपीजी की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में ईरान से आयात एक संभावित राहत जरूर दे सकता है, लेकिन ऊंची कीमत और कड़े भुगतान नियम इस विकल्प को कठिन बना रहे हैं।

ऊर्जा संकट के इस दौर में भारत के सामने विकल्प मौजूद हैं, लेकिन हर विकल्प के साथ जोखिम और लागत जुड़ी है। आने वाले दिनों में लिया गया फैसला देश की ऊर्जा रणनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।