साइटिका का बढ़ता खतरा: कमर से पैर तक बिजली जैसा दर्द बना लोगों की बड़ी समस्या
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Sciatica Pain
साइटिका में कमर से पैर तक तेज दर्द होता है.
गलत जीवनशैली और लंबे समय तक बैठना मुख्य कारण.
घरेलू उपाय और व्यायाम से मिल सकती है राहत.
Nagpur / आजकल बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण साइटिका की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार साइटिका कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में मौजूद साइटिक नर्व पर दबाव या जलन के कारण होने वाली एक गंभीर स्थिति है। यह नस कमर के निचले हिस्से से निकलकर कूल्हों और पैरों तक जाती है, इसलिए जब इस पर दबाव पड़ता है तो दर्द कमर से शुरू होकर जांघ, घुटने और कभी-कभी पैर की उंगलियों तक महसूस होता है। कई मरीज इसे बिजली के झटके जैसा दर्द बताते हैं, जो अचानक तेज हो जाता है और चलने-फिरने या बैठने में भी परेशानी पैदा कर देता है। डॉक्टरों का मानना है कि लगभग 40 प्रतिशत लोग अपने जीवन में कभी न कभी साइटिका के दर्द का अनुभव करते हैं। इसके प्रमुख कारणों में हर्नियेटेड डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस, पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम और हड्डियों में अतिरिक्त वृद्धि यानी बोन स्पर्स शामिल हैं। जब रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है या फट जाती है, तो वह नसों पर दबाव डालती है, जिससे दर्द बढ़ जाता है। इसी तरह रीढ़ की नलिका का संकरा होना भी नसों पर दबाव डालता है और साइटिका की समस्या पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह समस्या खासकर 30 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिलती है। इसके लक्षणों में कमर से पैर तक तेज दर्द, एक पैर में सुन्नता या कमजोरी, बैठने या खड़े होने पर दर्द का बढ़ना, झुकने में परेशानी और लंबे समय तक चलने में कठिनाई शामिल हैं। कई बार मरीज दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है और रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकती है।
आयुर्वेद और घरेलू उपचारों में भी साइटिका से राहत पाने के कई उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर शुरुआती अवस्था में दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार रात में हल्के गुनगुने अरंडी के तेल से कमर और प्रभावित पैर की मालिश करने से नसों को पोषण मिलता है और दर्द में राहत मिल सकती है। इसी तरह अश्वगंधा चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ लेने से नसों की कमजोरी दूर करने में मदद मिलती है। दशमूल काढ़ा भी वातनाशक माना जाता है और नियमित सेवन से सूजन तथा दर्द कम हो सकता है। लहसुन का दूध भी पारंपरिक घरेलू उपायों में शामिल है, जिसे रात में लेने से नसों के दर्द में आराम मिलता है। इसके अलावा गर्म सेक करना भी बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है, जिससे नसों की जकड़न कम होती है और मांसपेशियों को राहत मिलती है। कुछ लोग एप्सम सॉल्ट को गुनगुने पानी में मिलाकर स्नान भी करते हैं, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव कम होता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। साइटिका से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार करना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचना चाहिए, कुर्सी पर बैठते समय कमर सीधी रखनी चाहिए और नियमित रूप से हल्का व्यायाम तथा स्ट्रेचिंग करना चाहिए। वजन संतुलित रखना और ठंड से बचाव करना भी इस समस्या से बचने में मददगार हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर दर्द छह से आठ सप्ताह से ज्यादा समय तक बना रहे, पैर में लगातार सुन्नता या कमजोरी महसूस हो या चलने में संतुलन बिगड़ने लगे तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है, क्योंकि समय पर उपचार से ही इस समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।