कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, ईरान-इजरायल तनाव और गहराया
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कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, फ्यूल टैंक में लगी आग, कोई हताहत नहीं, ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच सुरक्षा चिंता बढ़ी।
कुवैत ने एयर डिफेंस सक्रिय कर कई ड्रोन मार गिराए, नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह, वैश्विक तेल और उड्डयन पर असर की आशंका।
Delhi/ पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच Iran और Israel के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। इस संघर्ष में United States की सक्रिय भूमिका के चलते हालात और जटिल हो गए हैं। इसी कड़ी में बुधवार को Kuwait स्थित Kuwait International Airport पर ड्रोन हमला किया गया, जिसने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस ड्रोन हमले में एयरपोर्ट परिसर के एक फ्यूल टैंक को निशाना बनाया गया, जिससे वहां आग लग गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। कुवैत के नागरिक उड्डयन विभाग ने बताया कि नुकसान सीमित रहा और स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया।
हमले के तुरंत बाद आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किया गया और दमकल विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे एयरपोर्ट परिसर को घेर लिया और जांच शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि यह पहला हमला नहीं है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस क्षेत्रीय संघर्ष के बाद से कुवैत कई बार निशाने पर आ चुका है। 8 मार्च को फ्यूल टैंकों पर हमला हुआ था, जबकि 14 मार्च को एयरपोर्ट के रडार सिस्टम को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया था। इससे पहले यात्री टर्मिनल पर हुए हमले में कुछ लोग घायल भी हुए थे। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि एयरपोर्ट अब एक रणनीतिक लक्ष्य बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि United States और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान अब खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है। इस संघर्ष का आज 26वां दिन है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
हमले के बाद कुवैत की सेना ने तत्काल एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया। सेना के मुताबिक, कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। नेशनल गार्ड ने पांच ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें। लोगों को अनावश्यक बाहर न निकलने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
यह पूरा घटनाक्रम अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय उड्डयन पर भी पड़ सकता है।