आंध्र में मिलावटी दूध से मौतें: NHRC ने लिया संज्ञान
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दूध में एथिलीन ग्लाइकॉल मिलावट की आशंका, पीड़ितों में किडनी फेल और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं, अधिकतर बुजुर्ग और बच्चे प्रभावित।
नरसपुरम की डेयरी पर संदेह, 100 से अधिक घरों में सप्लाई, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटे, कार्रवाई की तैयारी।
Andhra Pradesh/ आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में मिलावटी दूध के सेवन से हुई मौतों के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। इस घटना में अब तक 16 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य लोग अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) ने स्वतः संज्ञान लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में लालाचेरुवु, चौदेश्वरनगर और स्वरूपनगर शामिल हैं, जहां फरवरी 2026 के मध्य से लोगों के बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आने लगी थीं। पीड़ितों में पेट दर्द, उल्टी, पेशाब न आना और किडनी फेल होने जैसे गंभीर लक्षण पाए गए। इनमें अधिकतर बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दूध में एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले पदार्थ की मिलावट की गई थी, जिससे शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया। इस मिलावटी दूध का स्रोत नरसपुरम गांव की एक डेयरी बताई जा रही है, जो आसपास के 100 से अधिक घरों में दूध सप्लाई करती थी।
एनएचआरसी ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें जांच की स्थिति, पीड़ितों की स्वास्थ्य जानकारी और मृतकों के परिजनों को दिए गए मुआवजे का विवरण शामिल करने को कहा गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक लापरवाही और खाद्य सुरक्षा मानकों की गंभीर विफलता का मामला होगा।
इस घटना ने एक बार फिर खाद्य पदार्थों में मिलावट और उसकी निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब मामले की जांच में जुटे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।