जम्मू-कश्मीर में आपदा प्रबंधन में इसरो की बड़ी भूमिका: सैटेलाइट डेटा से निगरानी और राहत कार्य मजबूत

Mon 23-Mar-2026,11:49 PM IST +05:30

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जम्मू-कश्मीर में आपदा प्रबंधन में इसरो की बड़ी भूमिका: सैटेलाइट डेटा से निगरानी और राहत कार्य मजबूत Jammu Kashmir Floods
  • इसरो की सैटेलाइट तकनीक से आपदा निगरानी मजबूत. 

  • भुवन पोर्टल और एनडीईएम से रियल-टाइम डेटा उपलब्ध. 

  • राहत कार्य और पूर्व चेतावनी प्रणाली में सुधार. 

Jammu and Kashmir / Srinagar :

Srinagar / ISRO आज केवल अंतरिक्ष तक सीमित संस्था नहीं रह गई है, बल्कि देश में आपदा प्रबंधन और विकास योजनाओं में भी इसकी भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में, इसरो की तकनीक लोगों की सुरक्षा और बेहतर योजना निर्माण में अहम योगदान दे रही है।

जम्मू-कश्मीर में बाढ़, भूस्खलन और जंगल की आग जैसी प्राकृतिक आपदाएं अक्सर बड़ी चुनौती बनकर सामने आती हैं। ऐसे में इसरो द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे उपग्रह आधारित डेटा और भू-स्थानिक जानकारी इन आपदाओं की निगरानी और नुकसान के आकलन में बेहद उपयोगी साबित हो रही है। ‘भुवन’ जैसे पोर्टल और राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन डेटाबेस (एनडीईएम) के जरिए बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के मानचित्र, भूस्खलन की जानकारी और जंगल की आग की पहचान जैसे महत्वपूर्ण डेटा संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाए जाते हैं।

इतना ही नहीं, इसरो ने जम्मू-कश्मीर के वन विभाग के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन और विजुअलाइजेशन डैशबोर्ड भी विकसित किया है, जिससे जंगल की आग की रिपोर्टिंग और निगरानी और अधिक प्रभावी हो गई है। यह तकनीक वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराकर त्वरित कार्रवाई में मदद करती है।

इसरो और जम्मू-कश्मीर रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (जेकेआरएसएसी) के सहयोग से कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी चलाई जा रही हैं। इनमें प्राकृतिक संसाधनों की गणना, आर्द्रभूमियों की सूची, जैव विविधता का अध्ययन, मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण का मानचित्रण शामिल हैं। ये सभी प्रयास कृषि, वानिकी, ग्रामीण विकास और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बेहतर और साक्ष्य-आधारित योजनाएं बनाने में मदद करते हैं।

शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसरो सक्रिय है। जम्मू के केंद्रीय विश्वविद्यालय में सतीश धवन अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई है, जहां छात्रों और शोधार्थियों को अंतरिक्ष तकनीक की गहराई से समझ विकसित करने का अवसर मिलता है। इसके अलावा, एनआईटी जालंधर और एनआईटी कुरुक्षेत्र में स्थापित केंद्रों के माध्यम से छात्रों को अंतरिक्ष परियोजनाओं पर काम करने का मौका दिया जा रहा है।

इसरो का ‘रिस्पॉन्ड’ कार्यक्रम देशभर के शैक्षणिक संस्थानों को अंतरिक्ष अनुसंधान से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिससे कोई भी संस्थान अपनी परियोजना प्रस्तुत कर इस क्षेत्र में योगदान दे सकता है।

केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि इन सभी पहलों का उद्देश्य आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाना, समय रहते चेतावनी देना और बेहतर समन्वय स्थापित करना है। यह प्रयास न केवल जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि देश को तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त भी बनाते हैं।