2029 से महिला आरक्षण लागू, लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होने की तैयारी
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2029 से महिला आरक्षण लागू होने से लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और भारतीय राजनीति में लैंगिक संतुलन मजबूत होगा।
परिसीमन के बाद लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 816 होने की संभावना, जिससे जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व और अधिक संतुलित होगा।
Delhi/ भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने और सीटों के परिसीमन को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। यह कदम न केवल संसद के आकार को बढ़ाएगा, बल्कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी ऐतिहासिक रूप से मजबूत करेगा। प्रस्तावित बदलाव भारतीय राजनीति के स्वरूप और प्रतिनिधित्व दोनों को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, परिसीमन के बाद लोकसभा की कुल सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर लगभग 816 तक पहुंच सकती है। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाएगा। यह बदलाव जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम होगा। संसद का आकार बढ़ने से विभिन्न राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा और नीति-निर्माण में विविधता बढ़ेगी।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार 2029 से लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की योजना बना रही है। यदि कुल सीटें 816 होती हैं, तो लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ेगी और नीति-निर्माण में उनका योगदान अधिक प्रभावी होगा।
राज्यों के स्तर पर भी सीटों का नया समीकरण देखने को मिल सकता है। बड़े राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और केरल में सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि संभावित है। उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर लगभग 120, बिहार की 40 से बढ़कर 60 और केरल की 20 से बढ़कर 30 हो सकती हैं। इससे जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होगा।
सीटों की संख्या बढ़ने का असर अनुसूचित जाति और जनजाति वर्गों पर भी पड़ेगा। एससी सीटें 84 से बढ़कर लगभग 126 और एसटी सीटें 47 से बढ़कर करीब 70 हो सकती हैं। यह सामाजिक न्याय और समावेशिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
छोटे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में महिला आरक्षण लागू करने के लिए रोटेशन प्रणाली अपनाई जा सकती है। जिन क्षेत्रों में केवल 1 या 2 सीटें हैं, वहां हर तीसरे चुनाव में सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। इससे छोटे क्षेत्रों में भी महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्तावित बदलाव भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाएगा। 2029 का लोकसभा चुनाव इस लिहाज से ऐतिहासिक साबित हो सकता है, जहां संसद का स्वरूप, भागीदारी और राजनीतिक संतुलन एक नई दिशा में आगे बढ़ेगा।