गिग वर्कर्स की सच्चाई जानने डिलीवरी बॉय बने राघव चड्ढा, वीडियो वायरल

Tue 13-Jan-2026,01:30 AM IST +05:30

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गिग वर्कर्स की सच्चाई जानने डिलीवरी बॉय बने राघव चड्ढा, वीडियो वायरल
  • राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की समस्याओं को समझने के लिए ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय बनकर पूरा दिन काम किया, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।

  • ब्लिंकिट डिलीवरी पार्टनर के रूप में किया गया यह प्रयोग सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा में है। गिग इकॉनमी में श्रमिक अधिकार, सुरक्षा और आय स्थिरता पर नई बहस को मिला बल।

Delhi / New Delhi :

दिल्ली/ राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने गिग इकॉनमी से जुड़े श्रमिकों की वास्तविक चुनौतियों को समझने के लिए एक अनोखा कदम उठाया। दिल्ली-एनसीआर में, जनवरी 2026 के दौरान, उन्होंने एक दिन तक डिलीवरी बॉय बनकर काम किया। संसद में गिग वर्कर्स के मुद्दे उठाने के बाद, जमीनी सच्चाई जानने के उद्देश्य से उन्होंने यह पहल की। उनका यह प्रयोग सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की समस्याओं को न केवल संसद में उठाया, बल्कि अब उन्हें नजदीक से समझने के लिए खुद एक डिलीवरी बॉय की भूमिका निभाई। राघव चड्ढा ने ब्लिंकिट डिलीवरी पार्टनर की यूनिफॉर्म पहनकर, चेहरे पर मास्क लगाए और स्कूटी से पूरे दिन डिलीवरी की।

उन्होंने यह अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनका उद्देश्य किसी प्रचार का नहीं, बल्कि उन लाखों गिग वर्कर्स की रोजमर्रा की परेशानियों को महसूस करना था, जो लंबे समय तक काम करते हैं लेकिन सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा और स्थिर आय जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहते हैं।

चड्ढा ने यह वीडियो स्वयं अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया। वीडियो में वे सुबह से लेकर देर रात तक डिलीवरी करते नजर आते हैं। उन्होंने ग्राहकों के दरवाजे तक सामान पहुंचाया और यह समझने की कोशिश की कि ट्रैफिक, समय सीमा का दबाव, मौसम और ऐप आधारित रेटिंग सिस्टम किस तरह डिलीवरी कर्मियों पर मानसिक व शारीरिक दबाव डालता है।

वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “बोर्डरूम से दूर, जमीनी स्तर पर। मैंने उनका दिन जिया।” इस पोस्ट को कुछ ही घंटों में लाखों व्यूज मिले और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। यूजर्स ने राघव चड्ढा की इस पहल की जमकर सराहना की। कई लोगों ने इसे “संवेदनशील नेतृत्व” का उदाहरण बताया, जबकि कुछ ने मांग की कि अन्य जनप्रतिनिधि भी इसी तरह जमीनी अनुभव लें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम गिग वर्कर्स से जुड़े नीतिगत सुधारों की बहस को और मजबूती दे सकता है।

राघव चड्ढा पहले भी गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम आय, सामाजिक सुरक्षा और बीमा कवर की मांग कर चुके हैं। उनका यह प्रत्यक्ष अनुभव भविष्य में संसद में ठोस और व्यावहारिक सुझावों का आधार बन सकता है।