उपराष्ट्रपति ने 1998 कोयंबटूर बम धमाकों के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि
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उपराष्ट्रपति ने 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम धमाकों को राष्ट्र के इतिहास का काला अध्याय बताया।
उन्होंने भयावह घटना को याद करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
Delhi/ उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि 14 फरवरी 1998 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे कोयंबटूर शहर को झकझोर दिया था। उस समय वरिष्ठ नेता श्री एल. के. आडवाणी शहर के दौरे पर थे, जब अचानक हुए विस्फोटों ने दहशत का माहौल पैदा कर दिया।
उन्होंने बताया कि उस दिन की भयावहता और अनिश्चितता ने अनगिनत परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया। विस्फोटों की गूंज और चारों ओर फैले भय का वातावरण आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा है। एक धमाके में बाल-बाल बचने की घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि घायलों को बचाने और गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने के प्रयास उनके जीवन के सबसे पीड़ादायक क्षणों में से थे।
उपराष्ट्रपति ने आतंकवाद को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने दृढ़ संकल्प पर कायम है। उन्होंने सभी नागरिकों से एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने और शांति, सद्भाव तथा राष्ट्रीय अखंडता को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे दुखद प्रसंग हमें एकजुटता, साहस और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की याद दिलाते हैं।