छत्तीसगढ़ में महिला जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों की प्रॉक्सी नियुक्ति पर रोक
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छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों की प्रॉक्सी नियुक्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की आपत्ति के बाद सभी आयुक्तों और सीएमओ को सख्त निर्देश जारी किए गए।
Bhopal/ राज्य सरकार ने सभी नगरीय निकायों को एक प्रोफार्मा भेजकर जानकारी मांगी है कि किन जिलों और निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों को प्रतिनिधि या लायजन पर्सन के रूप में नियुक्त किया गया है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि संबंधित प्रतिनिधि किसी महिला महापौर, अध्यक्ष, सभापति या पार्षद का रिश्तेदार है या नहीं।
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि अब निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के रिश्तेदार किसी भी प्रकार की प्रतिनिधि नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे। विभाग ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
दरअसल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके रिश्तेदारों का काम करना संविधान की भावना के विपरीत है। आयोग ने ऐसे मामलों में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
गौरतलब है कि वर्ष 2010 में भी इसी प्रकार का आदेश जारी किया गया था, जिसमें महिला पदाधिकारियों के कामकाज में रिश्तेदारों के हस्तक्षेप पर रोक लगाई गई थी। हालांकि उस समय यह आदेश प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सका। इस बार सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि महिला जनप्रतिनिधियों की स्वायत्तता और अधिकारों की रक्षा के लिए आदेश को सख्ती से लागू किया जाएगा। इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।