अतिरिक्त सामान पर शुल्क, पर फ्लाइट देरी पर राहत नहीं—राघव चड्ढा का सवाल
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राघव चड्ढा ने कहा कि एयरलाइंस अतिरिक्त सामान पर शुल्क लेती हैं, लेकिन फ्लाइट लेट होने पर यात्रियों को कोई मुआवज़ा नहीं मिलता।
सांसद ने DGCA और सरकार से मांग की कि फ्लाइट देरी पर यात्रियों के लिए स्पष्ट और बाध्यकारी नियम बनाए जाएं।
यात्रियों का कहना है कि देरी से उड़ानें उनकी योजनाओं को प्रभावित करती हैं, इसलिए राहत या रिफंड की व्यवस्था जरूरी है।
नई दिल्ली / हवाई यात्रा के लगातार बढ़ते खर्च और एयरलाइंस द्वारा वसूले जा रहे अतिरिक्त शुल्कों के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने यात्रियों की सुविधा को लेकर एक अहम मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस अतिरिक्त सामान ले जाने पर भारी शुल्क तो लेती हैं, लेकिन यदि फ्लाइट घंटों देरी से चलती है, तब यात्रियों को कोई राहत, मुआवज़ा या शुल्क माफी नहीं मिलती। चड्ढा ने इस व्यवस्था को अनुचित बताते हुए इसे ‘एकतरफा नियम’ करार दिया।
उन्होंने कहा कि देश के कई एयरपोर्ट्स पर यात्री फ्लाइट लेट होने के कारण घंटों तक परेशानी झेलते हैं। कई बार यात्रियों को सूचना भी देर से दी जाती है, जिससे उनकी आगे की यात्रा, होटल बुकिंग और कामकाज प्रभावित होता है। इसके बावजूद किसी तरह का मुआवज़ा देना तो दूर, एयरलाइंस माफी तक नहीं मांगतीं। इसके उलट, यदि यात्री का बैग कुछ किलो अधिक हो जाए तो तुरंत बड़े-भरकम शुल्क वसूल लिए जाते हैं।
राघव चड्ढा ने मांग की है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA को इस पर स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए ताकि फ्लाइट देरी होने पर यात्रियों को अनिवार्य रूप से राहत मिले। उन्होंने सुझाव दिया कि देर से उड़ान भरने वाली फ्लाइट्स पर यात्रियों को किसी न किसी रूप में कंपनसेशन, वाउचर या आंशिक रिफंड देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हवाई यात्रा अब केवल लग्जरी नहीं रही, बल्कि आम मध्यम वर्ग भी विभिन्न कारणों से हवाई यात्रा करता है। इसलिए एयरलाइंस को यात्रियों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और देरी पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है। कई यात्रियों ने अपनी परेशानियों को साझा करते हुए कहा कि एयरलाइंस समय पर उड़ान न भरने के बावजूद कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेतीं। यात्री उम्मीद कर रहे हैं कि इस मुद्दे पर सरकार जल्द कोई कदम उठाएगी।