मकर संक्रांति: किसानों की मेहनत का उत्सव

Wed 14-Jan-2026,01:48 PM IST +05:30

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मकर संक्रांति: किसानों की मेहनत का उत्सव मकर संक्रांति
  • मकर संक्रांति किसानों की मेहनत और फसल पकने की खुशी का प्रतीक है.

  • यह पर्व प्रकृति, कृषि और ग्रामीण संस्कृति से गहराई से जुड़ा है.

  • समाज को अन्नदाता के सम्मान और संतुलन का संदेश देता है.

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur / भारत की सभ्यता और संस्कृति की जड़ें खेती में गहराई तक समाई हुई हैं। यहां ऋतु परिवर्तन, पर्व और परंपराएं सीधे तौर पर कृषि जीवन से जुड़ी रही हैं। मकर संक्रांति ऐसा ही एक पर्व है, जिसे सही अर्थों में किसानों का त्योहार कहा जाता है। यह पर्व उस समय आता है जब सूर्य उत्तरायण होता है और मौसम में सकारात्मक बदलाव शुरू होता है। ठंड का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है, दिन बड़े होने लगते हैं और खेतों में खड़ी फसलें पककर तैयार होने लगती हैं। महीनों तक मेहनत करने वाला किसान जब अपनी फसल को लहलहाते देखता है, तो उसके मन में संतोष और खुशी दोनों होती हैं। मकर संक्रांति उसी खुशी का सामूहिक उत्सव है। यह दिन किसान को यह एहसास कराता है कि उसकी मेहनत रंग लाई है और प्रकृति ने उसका साथ दिया है। इसी कारण यह पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेत, खलिहान और गांव के हर घर में उल्लास के रूप में दिखाई देता है।

मकर संक्रांति की परंपराओं में किसान जीवन साफ झलकता है। तिल, गुड़, चावल, गन्ना और नई फसल के अनाज का उपयोग इस पर्व में किया जाता है, जो सीधे खेतों से जुड़े होते हैं। ये पदार्थ किसान की मेहनत का प्रतीक हैं और इन्हें साझा करना भारतीय ग्रामीण संस्कृति की आत्मा को दर्शाता है। कई क्षेत्रों में बैलों की पूजा की जाती है, क्योंकि खेती में उनका योगदान किसान के लिए अमूल्य होता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व अलग नामों से मनाया जाता है, लेकिन हर जगह इसका केंद्र किसान ही होता है। कहीं पोंगल के रूप में नई फसल का स्वागत होता है, कहीं खिचड़ी के जरिए सामूहिक भोजन किया जाता है, तो कहीं लोहड़ी में आग के चारों ओर खुशियां बांटी जाती हैं।

आधुनिक समय में जब किसान अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, मकर संक्रांति समाज को यह याद दिलाती है कि अन्नदाता का सम्मान करना केवल एक दिन का नहीं, बल्कि निरंतर निभाया जाने वाला कर्तव्य है। मकर संक्रांति किसान, प्रकृति और समाज के बीच संतुलन का प्रतीक है और यही कारण है कि इसे सच्चे अर्थों में किसानों का त्योहार कहा जाता है।