भारतीय रेलवे की पटरी क्रांति: सुरक्षा, गति और विश्वसनीयता में ऐतिहासिक सुधार
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Rail Infrastructure Development
ट्रैक नवीनीकरण और आधुनिक रखरखाव से सुरक्षा में बड़ा सुधार.
110 किमी/घंटा से अधिक गति वाली पटरियों का नेटवर्क 80% तक बढ़ा.
यंत्रीकृत ट्रैक मशीनों और बाड़ से दुर्घटनाओं में कमी.
Delhi / पिछले ग्यारह वर्षों में भारतीय रेलवे ने अपनी पटरी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में जिस निरंतरता, निवेश और सुनियोजित क्रियान्वयन का परिचय दिया है, उसने देश के रेल नेटवर्क की तस्वीर बदल दी है। इन प्रयासों का सीधा असर रेल परिचालन की सुरक्षा, गति और विश्वसनीयता पर पड़ा है, जिससे करोड़ों यात्रियों और माल ढुलाई दोनों को लाभ मिला है। आज भारतीय रेलवे केवल दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक नहीं, बल्कि तकनीकी और परिचालन सुधारों के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पटरी नवीनीकरण पर निरंतर जोर
रेल सुरक्षा और परिचालन क्षमता का आधार मजबूत पटरियां होती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने बीते वर्षों में बड़े पैमाने पर ट्रैक रिन्यूअल का कार्य किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे ने 6,851 किलोमीटर से अधिक पटरियों का नवीनीकरण पूरा किया। इसके बाद चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक पटरियों के नवीनीकरण का कार्य जारी है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 2026-27 में 7,900 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण की योजना बनाई गई है। यह स्पष्ट करता है कि रेलवे केवल तात्कालिक सुधार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा और परिसंपत्ति विश्वसनीयता पर लगातार काम कर रहा है।
स्विच और क्रॉसिंग में तकनीकी उन्नयन
रेल संचालन की सुचारूता में स्विच और क्रॉसिंग की भूमिका बेहद अहम होती है। इसी वजह से रेलवे ने इनका आधुनिकीकरण तेज किया है। वर्ष 2024-25 में 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग स्थापित की गईं। वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा और बढ़ा है, जहां 8,000 से अधिक थिक वेब स्विच और 3,000 से अधिक वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग स्थापित की जा रही हैं। इससे न केवल ट्रेनों की गति में सुधार हुआ है, बल्कि तकनीकी खराबियों और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम हुई है।
गिट्टी और पटरी की गहन जांच
रेल पटरियों की स्थिरता और यात्रियों को बेहतर सफर अनुभव देने के लिए गिट्टी (बैलास्ट) की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसे सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे मशीनीकृत गहन जांच पर लगातार जोर दे रहा है।
वित्त वर्ष 2024-25 में 7,442 किलोमीटर पटरी की गहन जांच पूरी की गई, जबकि 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक पटरी की जांच का काम जारी है। यह प्रक्रिया ट्रैक की दीर्घायु बढ़ाने और रखरखाव लागत को नियंत्रित करने में भी मदद कर रही है।
ट्रैक मशीनों से बढ़ी उत्पादकता
रेलवे ने पारंपरिक मैनुअल रखरखाव से आगे बढ़ते हुए यंत्रीकृत रखरखाव को प्राथमिकता दी है। वर्ष 2014 से अब तक 1,100 से अधिक ट्रैक मशीनें खरीदी जा चुकी हैं। इन आधुनिक मशीनों से ट्रैक मेंटेनेंस का काम तेज, सटीक और सुरक्षित हो गया है। इससे न केवल मानव श्रम पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि कार्य की गुणवत्ता और गति में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
पटरी किनारे सुरक्षा बाड़: हादसों पर लगाम
रेल दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण मवेशियों का पटरियों पर आ जाना और अनाधिकृत प्रवेश भी होता रहा है। इसे रोकने के लिए रेलवे ने पटरी के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाने को प्राथमिकता दी है।
अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर रेल पटरियों पर बाड़ लगाई जा चुकी है। खासकर उन खंडों पर यह काम तेजी से हुआ है, जहां ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से चलती हैं। इससे न केवल मवेशी दुर्घटनाओं में कमी आई है, बल्कि रेल परिचालन भी अधिक सुरक्षित हुआ है।
तेज रफ्तार नेटवर्क की ओर भारतीय रेलवे
इन सभी प्रयासों का सबसे बड़ा परिणाम ट्रेनों की गति क्षमता में देखने को मिला है।
वर्ष 2014 में 110 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक की गति क्षमता वाली पटरियों की लंबाई 31,445 किलोमीटर थी, जो पूरे नेटवर्क का लगभग 40 प्रतिशत थी। आज यह आंकड़ा बढ़कर 84,244 किलोमीटर हो गया है, जो नेटवर्क का करीब 80 प्रतिशत है। इससे तेज ट्रेनों के संचालन, समयपालन और ऊर्जा दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
भारतीय रेलवे की यह प्रगति केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की सुरक्षा, समय की बचत और देश की आर्थिक गति से सीधे जुड़ी हुई है। निरंतर निवेश, आधुनिक तकनीक और दीर्घकालिक योजना के साथ भारतीय रेलवे एक ऐसे नेटवर्क की ओर बढ़ रहा है, जो सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद हो। आने वाले वर्षों में यह सुधार न केवल रेल यात्रा का अनुभव बदलेंगे, बल्कि भारत की लॉजिस्टिक्स और आर्थिक क्षमता को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।