राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्यों में आरएंडडी और सतत नवाचार पर जोर

Sun 11-Jan-2026,12:42 AM IST +05:30

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राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्यों में आरएंडडी और सतत नवाचार पर जोर नीति-आयोग-की-अध्यक्षता-में-कोयंबटूर-में-आयोजित-राष्ट्रीय-कार्यशाला (प्रतीकात्मक-Photo-AI-)
  • नीति आयोग के नेतृत्व में राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्य-स्तरीय आरएंडडी और नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करने पर व्यापक मंथन।

  • शिक्षाविदों, उद्योग और नीति-निर्माताओं ने अनुसंधान को उत्पादों और सामाजिक समाधान में बदलने की रणनीतियों पर चर्चा की।

  • जमीनी नवाचार, साझेदारी-आधारित मॉडल और नवाचार गवर्नेंस को भविष्य की विकास कुंजी बताया गया।

Delhi / New Delhi :

दिल्ली/ भारत के राज्य-स्तरीय नवाचार ढांचे को सुदृढ़ करने और अनुसंधान एवं विकास को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर में 8–9 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। नीति आयोग के नेतृत्व में आयोजित इस मंच पर नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और वैज्ञानिक संस्थानों ने सतत नवाचार और राज्य संस्थानों में आरएंडडी को मजबूती से जोड़ने पर मंथन किया।

“सस्टेनिंग इनोवेशन: एम्बेडिंग आरएंडडी इन स्टेट इंस्टीट्यूशंस” विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी ने की। आयोजन की मेजबानी अमृता विश्व विद्यापीठम ने तमिलनाडु राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से की। इसमें देशभर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रमुख, राज्य विभागों के योजना सचिव, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विभिन्न राज्य विज्ञान परिषदों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

अपने विशेष संबोधन में श्री सुमन बेरी ने कहा कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राज्यों को अब केवल नीतियों के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नवाचार के सह-निर्माता की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने राज्यों में अनुसंधान, विकास और नवाचार क्लस्टर तैयार करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मजबूत राज्य संस्थान ही राष्ट्रीय नवाचार क्षमता को स्थायी आधार प्रदान कर सकते हैं।

अमृता विश्व विद्यापीठम की प्रोफेसर-वाइस चांसलर डॉ. मनीषा विनोदिनी ने स्वागत भाषण में कहा कि नवाचार नीतियों को सफल बनाने के लिए शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को स्थानीय और राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर जोर दिया।

नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक प्रोफेसर विवेक कुमार सिंह ने कार्यशाला की थीम प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत ने शोध प्रकाशन और पेटेंट के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती इस ज्ञान को व्यावहारिक उत्पादों और सामाजिक-आर्थिक समाधानों में बदलने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यों की सक्रिय भागीदारी के बिना विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार इकोसिस्टम का विस्तार संभव नहीं है।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि आरएंडडी को अलग-अलग परियोजनाओं के रूप में नहीं, बल्कि गवर्नेंस के एक सतत और अभिन्न हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, भारत की नवाचार यात्रा का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य एक मजबूत और वितरित राष्ट्रीय नवाचार प्रणाली के सह-निर्माता बन पाते हैं या नहीं।

मिजोरम के ग्रामीण विकास मंत्री प्रोफेसर लालनिलावमा ने जमीनी स्तर के नवाचारों की अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि समुदायों में नवाचार की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन उन्हें अभी पर्याप्त पहचान और समर्थन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने लाभार्थी-आधारित योजनाओं से आगे बढ़कर साझेदारी-आधारित मॉडल अपनाने की जरूरत बताई, जिससे समुदाय स्वयं नवाचार प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बन सकें।

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार सिंह और नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन के पूर्व मिशन निदेशक डॉ. श्री आर. रामानन ने अनुसंधान संस्थानों, उद्योग समूहों, स्टार्टअप्स और सार्वजनिक क्षेत्र के बीच मजबूत जुड़ाव की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान सृजन से लेकर उसके अनुप्रयोग तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को निर्बाध बनाना समय की मांग है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषदों को सशक्त करने, नवाचार गवर्नेंस, प्रदर्शन बेंचमार्किंग और जमीनी नवाचारों को राज्य नीतियों से जोड़ने जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, सीएसआईआर, आईसीएमआर और उद्योग जगत के वरिष्ठ नेतृत्व ने इन चर्चाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यशाला का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि भारत की नवाचार यात्रा का अगला चरण मजबूत, संस्थागत और राज्य-स्तरीय आरएंडडी इकोसिस्टम पर आधारित होना चाहिए, जहाँ नीति से अभ्यास की ओर निर्णायक कदम उठाए जाएं।