JNU दीक्षांत में उपराष्ट्रपति ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण
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स्वामी विवेकानंद के विचारों और भारतीय ज्ञान परंपरा के उदाहरण देकर विकसित भारत 2047 की भूमिका स्पष्ट की।
लोकतांत्रिक बहस, सामाजिक समावेश और भारतीय भाषाओं में शिक्षा को राष्ट्रीय विकास का आधार बताया।
New Delhi/ उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों को बधाई दी और उनसे अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा को राष्ट्र सेवा में समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, बौद्धिक सुदृढ़ता और आत्मनिर्भरता विकसित करना होना चाहिए।
स्वामी विवेकानंद की जयंती का स्मरण करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सशक्त और मूल्य आधारित शिक्षा ही भारत के युवाओं को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047” के संकल्प को साकार करने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए नालंदा और तक्षशिला जैसे ऐतिहासिक शिक्षण केंद्रों का उदाहरण दिया और कहा कि उपनिषद, भगवद् गीता, कौटिल्य का अर्थशास्त्र और तिरुक्कुरल जैसे ग्रंथों ने शिक्षा को हमेशा नैतिकता और समाज से जोड़े रखा है।
उपराष्ट्रपति ने आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक मूल्यों के संतुलित विकास पर जोर देते हुए कहा कि यह संतुलन ही भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करेगा। जेएनयू के लोकतांत्रिक मूल्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि बहस, चर्चा और असहमति एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान हैं, लेकिन निर्णय के बाद सामूहिक रूप से उसके क्रियान्वयन में सहयोग भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने जेएनयू द्वारा छात्र प्रवेश और संकाय नियुक्ति में समानता और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने के प्रयासों की प्रशंसा की। साथ ही संस्कृत और भारतीय अध्ययन संकाय में हिंदू, जैन और बौद्ध अध्ययन केंद्रों की स्थापना तथा तमिल, असमिया, ओडिया, मराठी और कन्नड़ जैसी भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने की पहलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप बताया।
अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने छात्रों से तीन प्रमुख दायित्व निभाने का आग्रह किया-सत्य की खोज में बौद्धिक ईमानदारी, सामाजिक असमानताओं को कम करने के लिए समावेशी दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान। उन्होंने छात्रों से संविधानिक मूल्यों, सभ्यतागत नैतिकता, माता-पिता और शिक्षकों के सम्मान को जीवन का आधार बनाने की अपील की।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, जेएनयू के कुलाधिपति श्री कंवल सिबल, कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित सहित अनेक गणमान्य अतिथि, संकाय सदस्य, छात्र और उनके परिजन उपस्थित रहे।