Mumbai-Ahmedabad बुलेट ट्रेन परियोजना में बड़ी उपलब्धि

Fri 02-Jan-2026,05:59 PM IST +05:30

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Mumbai-Ahmedabad बुलेट ट्रेन परियोजना में बड़ी उपलब्धि Mumbai Ahmedabad Bullet Train Palghar Mountain Tunnel
  • हाई-स्पीड रेल परियोजना से यात्रा समय घटेगा, रोजगार बढ़ेगा और महाराष्ट्र-गुजरात के आर्थिक संपर्क को नई मजबूती मिलेगी।

  • बुलेट ट्रेन परियोजना पर्यावरण के अनुकूल है, जिससे सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai/ केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना के तहत महाराष्ट्र के पालघर जिले में पहली पर्वतीय सुरंग के सफल निर्माण की घोषणा की। यह सुरंग एमटी-5 विरार और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित है और लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी है, जो जिले की सबसे प्रमुख पर्वतीय सुरंगों में शामिल है।

एमटी-5 सुरंग की खुदाई अत्याधुनिक ड्रिल एंड ब्लास्ट तकनीक से दोनों सिरों से की गई, जिसे 18 महीनों में पूरा किया गया। इस तकनीक के जरिए जमीन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हुई और जरूरत के अनुसार शॉटक्रेट, रॉक बोल्ट और लैटिस गर्डर जैसी संरचनात्मक सुरक्षा व्यवस्थाएं अपनाई गईं। निर्माण के दौरान वेंटिलेशन, अग्नि सुरक्षा और सुरक्षित प्रवेश-निकास जैसी सभी मानक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

रेल मंत्री ने बताया कि इससे पहले सितंबर 2025 में ठाणे और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के बीच लगभग पांच किलोमीटर लंबी पहली भूमिगत सुरंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना कुल 508 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 27.4 किलोमीटर सुरंगें शामिल हैं। इनमें 21 किलोमीटर भूमिगत और 6.4 किलोमीटर सतही सुरंगें हैं। महाराष्ट्र में कुल सात पर्वतीय सुरंगों का निर्माण हो रहा है, जिनकी संयुक्त लंबाई छह किलोमीटर से अधिक है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो रहा है और परिचालन के बाद आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। परियोजना पूरी होने पर मुंबई से अहमदाबाद की यात्रा मात्र 1 घंटा 58 मिनट में पूरी होगी, जिससे दोनों प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह परियोजना पर्यावरण के लिहाज से भी अहम है, क्योंकि इसके संचालन से सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 95 प्रतिशत तक कमी आएगी। यह परियोजना भारत के परिवहन अवसंरचना में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम मानी जा रही है।