अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान जंग तेज, खाड़ी में मिसाइल हमले, मोदी-पुतिन सक्रिय कूटनीति

Mon 02-Mar-2026,10:19 PM IST +05:30

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अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान जंग तेज, खाड़ी में मिसाइल हमले, मोदी-पुतिन सक्रिय कूटनीति Iran Israel War
  • खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले तेज.

  • यूएई एयर डिफेंस ने कई हमले नाकाम किए.

  • वैश्विक नेताओं ने कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया.

Tel Aviv District / Tel Aviv :

Israel / अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान के साथ जारी संघर्ष तीसरे दिन और ज्यादा तीखा हो गया है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार एयरस्ट्राइक की जा रही हैं। अमेरिका और इजरायल जहां अपने लड़ाकू विमानों और मिसाइलों से ईरान के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई में तेल अवीव और उन पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दाग रहा है, जहां से हमलों को समर्थन मिलने का आरोप है। इस बढ़ते टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है।

कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि ईरानी हमलों के दौरान देश में कई अमेरिकी युद्धक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि सभी पायलट सुरक्षित बाहर निकल आए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। दुर्घटनाओं के कारणों पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी।

इस बीच भारत भी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर क्षेत्रीय स्थिति पर चिंता जताई और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने संघर्ष को जल्द समाप्त करने की आवश्यकता दोहराई। इससे पहले पीएम मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय से भी बातचीत की थी। भारत ने खाड़ी देशों की सुरक्षा और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के प्रति समर्थन व्यक्त किया है।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका के हमले ने परमाणु समझौते को अंतिम चरण में पहुंचने से पहले ही पटरी से उतार दिया। उनका कहना है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही थी, लेकिन सैन्य कार्रवाई ने कूटनीति को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति पर वार्ता के बीच हमले का आदेश देने का आरोप लगाया।

रूस ने भी इस बढ़ते टकराव पर गंभीर चिंता जताई है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान समेत फारस की खाड़ी के कई नेताओं से फोन पर बातचीत की। क्रेमलिन के मुताबिक, दोनों पक्षों ने माना कि संघर्ष का दायरा कई अरब देशों तक फैल चुका है और यदि इसे रोका नहीं गया तो इसके “विनाशकारी परिणाम” हो सकते हैं। पुतिन ने सैन्य टकराव की बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया। सऊदी नेतृत्व ने भी माना कि रूस अपने संतुलित संबंधों के कारण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।

संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 9 बैलिस्टिक मिसाइल, 6 क्रूज मिसाइल और 148 ड्रोन को मार गिराया। मंत्रालय के अनुसार, अब तक कुल 174 बैलिस्टिक मिसाइलें यूएई की ओर दागी गईं, जिनमें से अधिकांश को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। हालांकि कुछ संपत्तियों को हल्का नुकसान पहुंचा है और तीन लोगों की मौत तथा 68 के घायल होने की पुष्टि की गई है। तेज धमाकों की आवाजें एयर डिफेंस इंटरसेप्शन के कारण थीं।

कतर के रक्षा मंत्रालय ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि संयुक्त अरब अमीरात की वायुसेना ने ईरान के दो SU-24 लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। हालांकि इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह संघर्ष में एक महत्वपूर्ण सैन्य मोड़ माना जाएगा।

चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। चीन ने तत्काल युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की मांग की है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो पूरा खाड़ी क्षेत्र व्यापक युद्ध की चपेट में आ सकता है। वैश्विक शक्तियों की सक्रिय कूटनीति आने वाले दिनों में निर्णायक साबित हो सकती है, क्योंकि यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।