नमामि गंगे चरण-2 में बड़ी प्रगति, नए STP से नदियों का पुनर्जीवन तेज
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173 चालू एसटीपी और 3,976 एमएलडी क्षमता के साथ शहरी स्वच्छता और अपशिष्ट जल प्रबंधन ढांचा पहले से अधिक मजबूत हुआ।
SBR और हाइब्रिड एन्युटी मॉडल आधारित परियोजनाएं सतत नदी पुनर्जीवन और लाखों नागरिकों को स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध करा रही हैं।
New Delhi/ नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण के तहत वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में देश के विभिन्न राज्यों में पांच नई सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू किया गया है। यह पहल प्रदूषण नियंत्रण, नदी पुनर्जीवन और शहरी स्वच्छता को मजबूती देने की दिशा में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है। चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल नौ परियोजनाएं सफलतापूर्वक संचालित की जा चुकी हैं, जिससे प्रमुख शहरी क्षेत्रों में सीवेज शोधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इन नई परियोजनाओं के साथ नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत चालू सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की संख्या 173 हो गई है, जबकि कुल उपचार क्षमता बढ़कर 3,976 एमएलडी तक पहुंच चुकी है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि नदियों में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोका जा सकेगा और जल गुणवत्ता में सुधार होगा।
उत्तर प्रदेश के शुक्लागंज में 65 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 5 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी के संचालन से लगभग तीन लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर आधारित है और आधुनिक एसबीआर तकनीक का उपयोग करती है। वहीं आगरा में यमुना नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 31 एमएलडी और 35 एमएलडी क्षमता के दो नए एसटीपी शुरू किए गए हैं, जिनसे लगभग 25 लाख नागरिकों को बेहतर स्वच्छता सुविधा प्राप्त होगी।
पवित्र नगरी वाराणसी के अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू किया गया है। 308 करोड़ रुपये की इस परियोजना से गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल के उत्तर बैरकपुर में 30 एमएलडी क्षमता का नया एसटीपी शुरू होने से गंगा में अनुपचारित सीवेज के प्रवाह पर रोक लगेगी और लगभग 2.2 लाख लोगों को लाभ पहुंचेगा।
बिहार की राजधानी पटना के कंकरबाग स्थित एसटीपी की क्षमता 15 एमएलडी से बढ़ाकर 30 एमएलडी कर दी गई है, जिससे गंगा तटवर्ती क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास और सशक्त होंगे। ये सभी परियोजनाएं स्वच्छ नदियों, बेहतर शहरी जीवन और सतत पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करती हैं।