CSIR एकीकृत कौशल पहल से आत्मनिर्भर भारत हेतु उद्योग-तैयार कार्यबल मजबूत
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37 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण, महिला और तकनीकी युवाओं के लिए समावेशी कौशल विकास सुनिश्चित करते हैं।
चरण–III में उन्नत तकनीकों, उद्योग सहयोग और नवाचार पर फोकस के साथ आत्मनिर्भर भारत के लिए कुशल कार्यबल तैयार किया जा रहा है।
Delhi/ वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा संचालित सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल भारत में कौशल विकास के परिदृश्य को एक नई दिशा दे रही है। यह पहल विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को कौशल प्रशिक्षण के केंद्र में रखकर देश को एक सक्षम, कुशल और आत्मनिर्भर मानव संसाधन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों के साथ गहराई से जुड़ी यह पहल, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के बीच सेतु का कार्य कर रही है।
इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच लंबे समय से मौजूद अंतर को कम करना है। सीएसआईआर के पास देशभर में फैली 37 अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, विशाल अनुसंधान अवसंरचना और अनुभवी वैज्ञानिकों का नेटवर्क है। इसी ताकत का उपयोग करते हुए यह पहल कौशल विकास को प्रयोगशालाओं, उद्योगों और वास्तविक जीवन की जरूरतों से सीधे जोड़ती है।
सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी पहुंच है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, युवा शोधकर्ताओं, तकनीकी कर्मचारियों और कार्यरत पेशेवरों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों, आईटीआई व डिप्लोमा धारकों, किसानों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को भी समान अवसर प्रदान करता है। इससे यह पहल सामाजिक और आर्थिक समावेशन को भी मजबूती देती है।
इस पहल के अंतर्गत संरचित अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए गए हैं। इनमें प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, प्रमाणन पाठ्यक्रम और व्यावहारिक प्रयोगशाला अनुभव शामिल हैं। इन मॉड्यूल्स का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि प्रतिभागियों को व्यावहारिक दक्षता से लैस करना है ताकि वे रोजगार, उद्यमिता और करियर विकास के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (एनएसडीएम) द्वारा चिन्हित 36 प्रमुख क्षेत्रों में से 18 क्षेत्रों को कवर करता है। इनमें एयरोस्पेस एवं विमानन, कृषि, ऑटोमोटिव, निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, हरित रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स, जीवन विज्ञान, वस्त्र, खनन तथा आईटी एवं आईटीईएस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। यह विविधता सुनिश्चित करती है कि बदलती वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था की मांगों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सके।
सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल के चरण-I और चरण-II के दौरान उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गईं। ग्रामीण नागरिकों और महिलाओं के लिए विशेष लक्षित कार्यक्रमों सहित 5200 से अधिक कौशल-आधारित प्रशिक्षणों के माध्यम से 1.90 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े, बल्कि स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को भी प्रोत्साहन मिला।
इस पहल के तीसरे चरण का शुभारंभ जून 2025 में सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी द्वारा किया गया। चरण–III में उन्नत कौशल विकास, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा नवाचार आधारित विकास को गति देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके पहले ही वर्ष में देशभर की 37 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में 425 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 14,000 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
इस पूरे कार्यक्रम के प्रभावी संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी सीएसआईआर-मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी), गाजियाबाद निभा रहा है। नोडल कार्यालय के रूप में एचआरडीसी प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रशिक्षण उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो।
कुल मिलाकर, सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल न केवल रोजगारोन्मुखी कौशल विकसित कर रही है, बल्कि भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विज्ञान, उद्योग और समाज के समन्वय से यह पहल एक कुशल, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रही है।