MSME डीकार्बोनाइजेशन पर जोर
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बायोमास उपयोग से अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण आय सृजन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे बहुआयामी लाभ एक साथ प्राप्त होंगे।
सरकार, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से एमएसएमई डीकार्बोनाइजेशन को गति देने पर राष्ट्रीय कार्यशाला में जोर।
Delhi/ केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा एवं विद्युत राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा ने बीते दशक में अभूतपूर्व प्रगति की है। जैव ऊर्जा, जो पहले सीमित भूमिका में थी, अब देश के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की एक रणनीतिक आधारशिला बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जैव ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका, अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में समानांतर योगदान दे रही है।
राष्ट्रीय कार्यशाला “एमएसएमई में हरित भाप एवं ताप अनुप्रयोगों के लिए बायोमास का परिचय एवं उपयोग” को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि एमएसएमई भारत के विनिर्माण उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हैं और लाखों लोगों को रोजगार देते हैं, लेकिन उनकी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा अभी भी कोयला, फर्नेस ऑयल और पेट कोक जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भर है। यही कारण है कि एमएसएमई क्षेत्र का डीकार्बोनाइजेशन भारत के जलवायु लक्ष्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि बायोमास आधारित हरित भाप और ताप समाधान देश की परिस्थितियों के अनुरूप, लागत-प्रभावी और स्केलेबल विकल्प प्रस्तुत करते हैं। भारत में कृषि अवशेष, पशु अपशिष्ट और ठोस अपशिष्ट की प्रचुरता अपशिष्ट को मूल्य में बदलने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और किसानों व ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।
कार्यशाला के दौरान “एमएसएमई को कार्बन मुक्त करना: हरित भाप एवं ताप अनुप्रयोगों के लिए बायोमास का उपयोग” शीर्षक रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। मंत्री ने कहा कि यह रिपोर्ट कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, रसायन, फाउंड्री और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों के लिए आंकड़ों पर आधारित, क्षेत्र-विशिष्ट रोडमैप प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट में बायोमास परिनियोजन दायित्व, मानकीकृत भाप आपूर्ति समझौते, बायोमास एक्सचेंज और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल तकनीक से परिवर्तन संभव नहीं है। किसानों, एफपीओ, एग्रीगेटर्स, लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं, बॉयलर निर्माताओं, ऊर्जा सेवा कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और नियामकों के बीच समन्वय आवश्यक है। एमएसएमई को ईंधन उपलब्धता, मूल्य स्थिरता और नीतिगत भरोसे की जरूरत है, जिसे इस तरह के मंच मजबूत करते हैं।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि बायोमास आधारित समाधान देशभर में विकेंद्रीकृत ऊर्जा पहुंच, ग्रामीण रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने अनुसंधान, बहु-ईंधन बॉयलर तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विशेषकर जर्मनी के साथ साझेदारी, को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में केंद्र व राज्य सरकारों, उद्योग, वित्तीय संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और तकनीकी भागीदारों की सक्रिय भागीदारी रही। यह पहल एमएसएमई क्षेत्र को हरित ऊर्जा की ओर तेजी से ले जाने में मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।